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नताशा नरवाल : पिता को था बेटी पर गर्व, इमरजेंसी में वह भी गए थे जेल, कुछ दिन पहले हुआ निधन वो होते तो...

Fri, 18 Jun 2021 01:13 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

तीनों में से नताशा ने इस दौरान अपने पिता को खो दिया है बीते महीने ही कोरोना के चलते उनका निधन हो गया। हमारी इस स्टोरी में पढ़ें नताशा के पिता महावीर नरवाल के कुछ पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बेटी को लेकर क्या कहा था और दोनों का रिश्ता कितना गहरा था, साथ ही नताशा के भाई क्या कहते हैं उनकी रिहाई पर....
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natasha narwal - फोटो : अमर उजाला
उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश से जुड़े मामले में जेल में बंद देवांगना कलिता व नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा को गुरुवार(17 जून) शाम जेल से रिहा कर दिया गया। देवांगना और नताशा तिहाड़ के जेल नंबर छह में बंद थीं, जबकि आसिफ जेल नंबर चार में बंद था। जेल अधिकारियों के अनुसार जेल में आदेश आने के बाद तीनों को जेल से विधिवत रूप से रिहा कर दिया गया है। जेल के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक कलिता और नरवाल को शाम करीब सात बजे और तन्हा को शाम करीब साढ़े सात बजे रिहा किया गया।

सूत्रों के अनुसार जमानत का आदेश आने के समय आसिफ दक्षिण दिल्ली में पुलिस की निगरानी में परीक्षा के सिलसिले में गया हुआ था। रिहाई की प्रक्रिया को पूरी करने के लिए आसिफ को वापस जेल में बुलाया गया और फिर सारी प्रक्रिया को करने के बाद तीनों को छोड़ दिया गया। जेल के बाहर इनके कुछ समर्थक भी आए हुए थे। तीन छात्र कार्यकर्ताओं को उनके पते और जमानत की पुष्टि में देरी के कारण समय पर जेल से रिहा नहीं किया गया था।

तीनों में से नताशा ने इस दौरान अपने पिता को खो दिया है बीते महीने ही कोरोना के चलते उनका निधन हो गया। हमारी इस स्टोरी में पढ़ें नताशा के पिता महावीर नरवाल के कुछ पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बेटी को लेकर क्या कहा था और दोनों का रिश्ता कितना गहरा था, साथ ही नताशा के भाई क्या कहते हैं उनकी रिहाई पर....
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देवांगना नताशा और आसिफ इकबाल हुए रिहा - फोटो : पीटीआई
नताशा अपने पिता की बहुत लाडली थी। जब वह 13 वर्ष की थी तब मां का देहांद हो गया। उनके पिता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उसके चार-पांच दिन बाद ही नताशा वापस पढ़ने में लग गई और उस साल उसके अपने क्लास में सबसे ज्यादा नंबर आए थे। पिता महावीर नरवाल ने कहा था कि उनका और बेटी नताशा का रिश्ता इतना गहरा था कि जब वह परीक्षा देती थीं तो वह बता सकते थे कि उसके कितने नंबर आएंगे।
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devangana kalita natasha narwal - फोटो : पीटीआई
बचपन से ही जागरूक है नताशा
नताशा बचपन से ही बेहद जागरूक रही है। पिता ने बताया था कि जब 2004 के लोकसभा चुनाव हो रहे थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री ने कहीं कह दिया था कि हमें मुस्लिमों के वोट ही नहीं चाहिए तो उसने जोरदार विरोध किया था और पिता से कहा था कि पापा ये लोग गलत कर रहे हैं। धीरे-धीरे उसका रुझान महिलाओं के मुद्दों की ओर बढ़ने लगा। यही वजह थी कि नताशा ने पिंजरा तोड़ ग्रुप ज्वाइन किया।

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devangana kalita natasha narwal - फोटो : पीटीआई
महावीर नरवाल ने एक बार बताया था कि नताशा को सफदर हाशमी का वह शेर बहुत प्रेरित करता है कि, औरतें उठीं नहीं तो जुल्म बढ़ता जाएगा। औरतों का उठना बहुत जरूरी है। एक बार जब उसने पिंजरा तोड़ ग्रुप ज्वाइन कर लिया तो उसे मंजिल मिल गई। महावीर नरवाल ने बताया था कि वह जेल में ऊर्दू सीख रही है और उन्होंने उसके लिए किताबों का भी इंतजाम किया हुआ था। उन्होंने बताया था कि नताशा मुख्य रूप से महिला समानता व आजादी पर लिखी गई किताबें ही पढ़ती है।
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devangana kalita natasha narwal - फोटो : पीटीआई
पिता ने कहा था- लड़कियां जेल नहीं जाएंगी तो कैसे सीखेंगी
महावीर नरवाल ने एक बार कहा था कि जेल इतनी कोई खौफ की चीज नहीं है, वह रह लेगी। वह आपातकाल के दौरान जेल गए थे। वे कहते थे कि लड़कियां जेल नहीं जाएंगी तो कैसे सीखेंगी। नताशा के पिता ने बताया था कि वह जेल में भी योग करती हैं और वहां लोग उन्हें सिखाने के लिए भी कहते हैं।
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asif iqbal tanha - फोटो : पीटीआई
नताशा के भाई आकाश ने बहन को जमानत मिलने पर दी प्रतिक्रिया
बहन की रिहाई की खबर मिलने से उन्होंने राहत और उदासी दोनों महसूस की। बीते माह नताशा के पिता महावीर नरवाल का कोरोना के कारण निधन हो गया था। नताशा को पिता की मृत्यु के बाद तीन सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी। जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद तिहाड़ जेल में उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। 
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devangana kalita natasha narwal - फोटो : पीटीआई
जब हमारे पिताजी का निधन हुआ था तब मुझे इस बात का दुख हुआ था कि नताशा उनसे बात नहीं कर सकी। आकाश ने कहा कि मुझे पूरा यकीन है कि पिता के आखिरी विचार नताशा के बारे में रहे होंगे। जमानत के आदेश की खबर से मुझे राहत और दुख दोनों हुआ। सामान्य परिस्थितियों में यह एक उत्सव होता लेकिन हर पल सोचा कि हमारे पिता अपनी बेटी को देखकर कितने खुश होते। आकाश के अनुसार जब नताशा की जमानत की अवधि समाप्त होने वाली थी, तब एक दो दिन पहले मैंने नताशा से बात करने की हिम्मत जुटाई। अब हम अपने पिता के बारे में दिल से बात कर सकेंगे।
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