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शव के इंतजार में सूख गए आंसू: अकबर बोला- जला हुआ शव दिखा रहे हैं साहब, किसको उठाकर ले जाऊं

Mon, 16 May 2022 03:42 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुंडका अग्निकांड के पीड़ित लोग - फोटो : amar ujala
मुंडका अग्निकांड में न जाने कितने बेगुनाह लोगों ने अपने चाहने वालों को खो दिया और दर्द भरे आंसुओं का सामना कर रहे हैं। मगर संजय गांधी अस्पताल की मोर्चरी के सामने पिछले 24 घंटे से अपनी पत्नी मुसर्रत का शव पाने के इंतजार में बैठे अकबर के आंसू सूख चुके हैं। उनसे यह पूछने पर कि क्या हुआ, उनकी पत्नी का कुछ पता चला? तो अकबर कहते हैं, कि जला हुआ शव दिखा रहे हैं साहब, किसको उठाकर ले जाऊं। 
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बाएं से दूसरा अकबर - फोटो : amar ujala
अकबर ने यह भी कहा कि डॉक्टर साहब कह रहे हैं, कि सभी शवों की पैकिंग हो गई है। इनके नमूने हैदराबाद जाएंगे, वहां से जांच रिपोर्ट आएगी तभी पता चलेगा, कि जो शव यहां रखे हैं, मुसर्रत उनमें से ही एक है या नहीं।
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मुंडका अग्निकांड के पीड़ित लोग - फोटो : amar ujala
अकबर किसी से आंख मिलाकर ठीक से बात नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने गर्दन झुकाए अपनी बात रखी, उन्होंने कहा कि वो तो चली गई, अब बच्चों की फिक्र है। किसके सहारे बच्चे पालूंगा, सब वही देखती थी, मैं तो हमेशा दिल्ली से बाहर रहता था। जब अकबर को मुसर्रत के बारे में पता चला, तो वह उड़ीसा में थे। शाम को छह बजे उनके जीजा अनवर ने बताया, कि जहां उनकी पत्नी काम करती है, उस बिल्डिंग में आग लग गई है, वह मौके पर ही हैं। 

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संजय गांधी अस्पताल के शव घर में अपनों की तलाश करते लोग - फोटो : amar ujala
उन्होंने अकबर को बताया कि पूरी बिल्डिंग जल रही है। इतना सुनने के बाद अकबर तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वह शनिवार को दोपहर प्रवेश नगर आकर अपने बच्चों से मिल पाए। उनकी बड़ी बेटी 11 साल की है, दूसरी बेटी छह साल की है और बेटा डेढ़ साल का है। 
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मुंडका अग्निकांड के पीड़ित लोग - फोटो : amar ujala
अकबर की बड़ी बेटी समझदार है, वह मां के लिए ज्यादा परेशान है। अकबर पेशे से ड्राइवर हैं, उनकी पत्नी मुसर्रत बिल्डिंग में स्थित आई क्लीयर कंपनी में कैमरों की पैंकिंग और लेबलिंग का काम करती थी। वहां उसे छह हजार रुपये प्रति माह मिलते थे। शुक्रवार को जब वह काम पर जाने के लिए तैयार हो रही थी, तब उनकी अकबर से आखिरी बार बात हुई थी। 
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जिद करके बाहर निकलती थी लाडली...

बेटी की जिद के आगे एक बेबस पिता आज नम आंखों से अपनी बेटी की तलाश में दर दर भटक रहे हैं। पिता ने बेटी को 12वीं तक पढ़ाने के बाद उसे सिलाई मशीन खरीदकर दी थी और घर पर ही काम कर दो चार पैसे कमाने के लिए कहा। लेकिन कुछ दिन काम करने के बाद बेटी का मन नहीं लगा और उसने पिता से जिद कर मुंडका की कंपनी में काम करना शुरू कर दिया था। 

रविवार को अपने परिवार के साथ घटनास्थल पर पहुंचे मूलत: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर के रहने वाले विजय बहादुर तिवारी उर्फ पंडित जी ने बताया कि वह इलाके में ई-रिक्शा चलाते हैं। उसकी बड़ी बेटी मोनिका तिवारी(21) ने बलरामपुर से ही 12वीं तक की पढाई की है। 12वीं करने के बाद वह अपनी बेटी को लेकर वहां से दिल्ली आ गए। उसके बाद उसने अपनी बेटी को एक सिलाई मशीन खरीदकर दी और घर में ही दो चार पैसे कमाने की बात कही। 

बेटी ने भी पिता की बात मानते हुए काम करने लगी। लेकिन उसका काम में मन नहीं लगा। उसने अपने पिता से कहा कि उसे घर के अंदर काम करने में मन नहीं लग रहा है और वह बाहर काम करना चाहती है। विजय बहादुर ने बताया कि वह बेटी के जिद के आगे नतमस्तक हो गए और उसे बाहर काम करने के लिए भेजा। पड़ोस की एक महिला की मदद से वह यहां तीन माह से काम कर रही थी। उसका काम में दिल लग रहा था। तीन दिन पहले वह बलरामपुर गए थे। 

शनिवार को उनके पास परिवार वालों का फोन आया। उनलोगों ने उन्हें कंपनी में आग लगने की जानकारी नहीं दी। सुबह दिल्ली स्थित घर पहुंचने पर बेटी के घटना के बाद से गायब होने की जानकारी मिली। परिवार के सदस्य शनिवार से ही मोनिका की तलाश कर रहे हैं लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला है। अब वह खुद उन जगहों पर बेटी की तलाश की लेकिन वह नहीं मिली। उन्हें यह पता नहीं चल पा रहा है कि उनकी बेटी कैसे मिलेगी। निराशा के बीच उन्होंने एसडीएम कार्यालय पहुंच कर बेटी के गायब होने की सूचना दी है। 
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