चांदनी चौक के बल्लीमारान स्थित राबिया गर्ल्स पब्लिक स्कूल में चार से पांच वर्ष की बच्चियों को बंधक बनाने को लेकर बुधवार को भी अभिभावकों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। उन्होंने स्कूल के बाहर जमकर हंगामा किया। अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर बच्चियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहा। उधर, शिक्षा विभाग की टीम ने स्कूल पहुंचकर मामले की जांच की।
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स्कूल पर फीस न देने पर बच्चियों को तहखाने में बंद करने का आरोप है। स्कूल के बाहर अभिभावकों की भीड़ ने हंगामा किया। पुलिस भी मौजूद रही। हंगामा कर रहे अभिभावकों का कहना था कि स्कूल का प्रबंधन ठीक नहीं है। अक्सर बच्चियों को फीस के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है। अभिभावकों ने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल खड़े किए। अभिभावकों का कहना था कि इस मामले में जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ एक्शन होना चाहिए।
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एफआईआर दर्ज होने के मामले पर अभिभावकों ने कहा कि वे स्कूल को बंद कराना नहीं, बल्कि प्रबंधन के रवैये में सुधार चाहते हैं। मंगलवार तक इस मामले पर चुप्पी साधे स्कूल प्रशासन ने अपना पक्ष बुधवार को सामने रखा। स्कूल का प्रशासन का कहना है कि अभिभावकों फीस जमा कराने के कई बार रिमाइंडर भेजे गए।
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प्रिंसिपल
- फोटो : अमर उजाला
स्कूल प्रिंसिपल डॉ नाहीद आर.उस्मानी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ अभिभावकों ने घटना को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। जिस तहखाने में बच्चियों को बंधक बनाए जाने की बात कही जा रही है, वह एक्टिविटी रूम है और वहां पंखे लगे हैं। बच्चियों के साथ वहां दो शिक्षक भी मौजूद थे। कुछ अभिभावकों ने कई महीने से फीस जमा नहीं कराई है। फीस के बिना स्कूल को चलाना मुश्किल है। कुछ अभिभावकों ने उस दिन शिक्षकों के साथ अभ्रद्रता की और ऊंची आवाज के कारण बच्चे डर गए। दिखाया ऐसा गया कि बंधक बनाने से बच्चे डरे हुए थे।
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- फोटो : अमर उजाला
इमरान हुसैन ने किए प्रिंसिपल से सवाल
दिल्ली सरकार के खाद्य मंत्री और बल्लीमारान से विधायक इमरान हुसैन बुधवार को स्कूल पहुंचे और प्रिंसिपल से कड़े सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि स्कूल ने सरकारी नियमों का पालन क्यों नहीं किया। सरकारी नियमों के अनुसार फीस न दिए जाने पर न तो बच्चों को सजा दी जा सकती है और न ही स्कूल से बाहर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में स्कूल प्रिंसिपल या मैनेजमेंट जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ एक्शन होगा। यदि किसी बच्ची के साथ कोई हादसा हो जाता तो कौन जिम्मेदार होता। बच्चों पर जुल्म बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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rabea girls school
- फोटो : अमर उजाला
शिक्षक और छात्राएं स्कूल के समर्थन में
स्कूल पर भले बच्चियों को बंधक बनाने के आरोप लग रहे हों, लेकिन इसके शिक्षक व छात्राएं प्रबंधन के समर्थन में सामने आ गए हैं। अभिभावकों के हंगामे के बाद बड़ी संख्या में छात्राएं स्कूल प्रिंसिपल डॉ नाहीद आर उस्मानी के कमरे में पहुंच गईं और हंगामा कर रहे अभिभावकों से स्कूल की छवि खराब न करने के लिए कहती रहीं। स्कूल प्रशासन छात्राओं को वहां से जाने के लिए समझाता रहा। छात्राओं का कहना था कि कुछ लोग स्कूल की छवि को जान-बूझकर खराब कर रहे हैं, जबकि स्कूल और यहां के शिक्षक काफी अच्छे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता भी काफी बेहतर है। स्कूल व शिक्षकों पर आरोप लपूरी तरह से गलत हैं। इस पर अभिभावकों का कहना था कि स्कूल ने उन्हें ऐसा करने के लिए सिखाया-पढ़ाया है। वहीं, शिक्षकों का कहना था कि कुछ अभिभावकों की वजह से स्कूल बंद हो जाएगा। अभिभावकों से बातचीत करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन वह लगातार शिक्षिकाओं से अभद्रता करते आ रहे हैं। यह मामला बातचीत से सुलझ सकता है। शिक्षक भी प्रिंसिपल व स्कूल प्रबंधन के साथ खड़े नजर आए।
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स्कूल के बाहर फीसबुक दिखाते अभिभावक
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली महिला आयोग का नोटिस
फीस जमा न करने पर 59 बच्चियों को लगभग पांच घंटे तक बेसमेंट में बंद करने के मामले में दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है। इस मामले में आयोग ने मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लिया। आयोग ने पुलिस और शिक्षा विभाग से घटना से संबंधित सारे तथ्य और उनके द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी 17 जुलाई तक मांगी है।
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग की जांच शुरू
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। आयोग सदस्य अनुराग कुंडु ने बताया कि आयोग की तीन सदस्यीय टीम ने बुधवार को स्कूल का दौरा किया। वहां अभिभावकों, बच्चियों व शिक्षकों से बातचीत की गई। इसके साथ ही पूरे स्कूल का मुआयना किया गया। निरीक्षण के आधार पर अब आयोग स्कूल को शुक्रवार तक कारण बताओ नोटिस जारी करेगा। नोटिस का जवाब 7 दिन में देना होगा।