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Bhajan Sopori Passed Away: संतूर से सम्मोहित और तारों पर करते थे स्वरों की अठखेलियां, कहते थे- कश्मीर और 'वाद्य' का ये है रिश्ता

Thu, 02 Jun 2022 06:05 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संतूर वादक पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी को सम्मोहित किया। उन्होंने राग यमन पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। वो जिस कार्यक्रम में पहुंचे, अपनी प्रतिभा और प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध किया।
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Bhajan Sopori - फोटो : अमर उजाला
मशहूर संतूर वादक पंडित भजन सोपोरी का गुरुवार को निधन हो गया। जिसकी खबर मिलते ही संगीत घरानों के साथ ही देश में दुख की लहर दौड़ गई। वह 74 साल के थे। भजन सोपोरी की पहचान जम्मू-कश्मीर के सांस्कृतिक चेहरे में रही। उन्होंने संतूर के विभिन्न आयामों का पता लगाने के साथ ही कई ऐसे नवाचार किए, जो वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए पथ प्रदर्शक के रूप में काम करेंगे। सोपोरी को संतूर के संत के साथ ही स्ट्रिंग्स के राजा के रूप पहचान मिली।

पंडित सोपोरी का जन्म वर्ष 1948 में श्रीनगर में हुआ था। उनका पूरा नाम भजन लाल सोपोरी और पिता का नाम पंडित शंभूनाथ सोपोरी था। वह भी एक संतूर वादक थे। भजन सोपोरी का ताल्लुक कश्मीर के प्रसिद्ध सोपोरी सूफियाना घराने से है। भजन सोपारी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में सोपोरी बाज की स्थापना की। शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, जम्मू-कश्मीर सरकार लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2016, जम्मू-कश्मीर राज्य पुरस्कार-2007 आदि पुरस्कार प्राप्त हुए। 
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Bhajan Sopori - फोटो : सोशल मीडिया
भजन सोपोरी का कहना था कि सूफी गायन में संतूर बेहद महत्वपूर्ण है। वो कहते थे कि संतूर को कश्मीर का लोक वाद्य नहीं, सूफी वाद्य कहा जाना चाहिए। वास्तव में इसे लोक वाद्य कहना इसके महत्व को कमतर कर आंकने जैसा है। सूफी गायन में संतूर के अपने ठाठ रहे हैं। सूफी कलाकारों के दल में सितार वादक तो कई हो सकते हैं लेकिन संतूर वादक एक ही होता रहा है और वही दल का नायक भी होता है।

 
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Bhajan Sopori Passed Away - फोटो : सोशल मीडिया
कश्मीर में सूफी गायन में बजता रहा है। इसका प्राचीन नाम शततंत्री वीणा रहा है। सोपोरी बताया करते थे कि उनके दादा शंकर पंडित जी संतूर के संस्कृत में बंदिशें गाया करते थे। पिता शंभूनाथ सोपोरी भी संतूर कलाकार थे। पिता के ही मार्गदर्शन में संतूर सीखा।

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संतूर वादक भजन सोपोरी - फोटो : amar ujala
उनका कहना था कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में इसे लोकप्रिय करने का श्रेय मुझे ही मिलना चाहिए। पं. शिवकुमार शर्मा तबला बजाते थे और उन्हें भी मेरे पिता ने ही संतूर दिया था।

 
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संतूर वादक भजन सोपोरी - फोटो : amar ujala
संतूर को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के अनुकूल करने के लिए संतूर में उन्होंने कई बदलाव किए। 25 गोटे (ब्रिज) के संतूर को उनके पिता ने 27 ब्रिज का किया और उन्होंने इसे 44 ब्रिज का कर दिया। इसलिए उनका दावा था कि उनका संतूर दूसरे संतूर वादकों के बड़ा है। 
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