ट्विन टावर जमींदोज होने के बाद आसपास की इमारतों में दरार की शिकायतें मिल रही हैं। दीवारों में दरार पहले से थी या बाद में ऐसा हुआ, इसकी जांच शुरू हो गई है। इसका सच भी जल्द ही सामने आ जाएगा। टावर ध्वस्त करने से पहले सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) ने पहले से दरार वाली 30 जगह क्रेक मैजरमेंट स्केल लगाए गए। जांच टीम इसी के आधार पर संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट तैयार करेगी। ट्विन टावर को ध्वस्त करने से पहले प्री-स्ट्रक्चरल ऑडिट किया गया था। इस दौरान पहले की दरार या टूटे प्लास्टर वाली लोकेशन पहचानी गई थी। ध्वस्तीकरण से पहले क्रेक मैजरमेंट स्केल को दरारों की चौड़ाई मापकर फिट किया गया था। ध्वस्तीकरण के बाद की स्थिति का पता लगाने के लिए इन स्केल को हटाकर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसकी ऑडिट रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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ट्विन टावर
- फोटो : अमर उजाला
कंपनी का इंकार, निवासी कर रहे शिकायत
घर लौट रहे निवासी फ्लैटों की जांच में जुटे हैं। इस बीच कई जगह दरार आने की शिकायत भी एडिफिस इंजीनियरिंग कंपनी और प्राधिकरण अधिकारियों से की जा रही है। हालांकि, कंपनी और प्राधिकरण के अधिकारियों ने ध्वस्तीकरण के दौरान नजदीकी आवासीय इमारतों को किसी भी तरह के नुकसान से इंकार किया है।
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ट्विन टावर
- फोटो : अमर उजाला
इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट जल्द
ध्वस्तीकरण से पहले इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया गया था। सुपरटेक की तरफ से इसकी रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंपी गई थी। अब ध्वस्तीकरण के बाद फिर से एक-दो दिन ऑडिट शुरू होगा। सुपरटेक कंपनी ही ऑडिट कराएगी।
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ट्विन टावर
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय आरडब्ल्यूए भी ऑडिट की तैयारी में है। ट्विन टावर को सफलतापूर्वक सुरक्षित तरीके से ध्वस्त करने वाली दक्षिण अफ्रीकी कंपनी जेट डिमोलिशन के विशेषज्ञ बुधवार शाम अपने देश रवाना होंगे। करीब 6 महीने से 7 से 8 विशेषज्ञों की टीम नोएडा में थी।
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ट्विन टावर का मलवा
- फोटो : अमर उजाला
ट्विन टावर के जमींदोज होने के बाद अब कार्रवाई में तेजी लाएगी विजिलेंस
वहीं, सुपर टेक के ट्विन टॉवर को ढहाए जाने के बाद अब दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की कवायद भी शुरू हो गई है। इस मामले की जांच कर रही विजिलेंस अपनी जांच में तेजी ला रहा है। विजिलेंस ने संबंधित लोगों से दस्तावेज तलब किए हैं। सूत्रों का कहना है कि काफी दस्तावेज मिल भी चुके हैं। जिसके बाद अब आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
उधर, गृह विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर ट्विन टावर को अग्निशमन की ओर से एनओसी देने में अनियमितता करने वाले अधिकारियों पर भी शिकंजा कस गया है। इन अधिकारियों के खिलाफ नोएडा कमिश्नरेट के फेज-2 थाने में 14 अगस्त को मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। इसमें तत्कालीन मुख्य अग्निशमन अधिकारी रहे राजपाल त्यागी, आईएस सोनी और महावीर सिंह को आरोपी बनाया है। यह एफआईआर अग्निशमन विभाग की आंतरिक जांच के बाद दर्ज कराई गई है।