धूल न उड़े इसके लिए पानी छिड़कते मजदूर
- फोटो : लाल सिंह
जल्द ही साफ हो जाएगी धूल
विस्फोट के दौरान धूल का गुबार तो उठेगा, लेकिन आठ से दस मिनट में ही धूल छंट जाएगी। इसके बाद पानी बरसाकर धूल को बैठाने का काम किया जाएगा। ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के दौरान फायर टेंडर, एंबुलेंस के साथ ही एनडीआरएफ की टीम भी मौजूद रहेगी। उत्कर्ष ने बताया कि पूरी तरह से कंट्रोल ब्लास्ट होगा। आवाज ठीक वैसी होगी, जैसे दिवाली के दौरान आसमान में जाकर आवाज करने वाले पटाखे की होती है।
कंक्रीट के कॉलम में किए जाएंगे सात हजार छेद
ट्विन टावरों के कंक्रीट के कॉलम में सात हजार छेद कर उनमें विस्फोटक लगाए जाएंगे। विस्फोटक ग्राउंड फ्लोर, 1, 2, 6, 10, 14, 18, 22, 26 और 30वीं मंजिल पर लगाए जाएंगे। विस्फोटक लाने के लिए रोजाना दो वाहनों को लगाया जाएगा। इस दौरान तकनीशियनों के अलावा किसी को टावरों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। ट्विन टावर में लगने वाला विस्फोटक करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर रखा जाएगा।