छतों से ईंट-पत्थर बरस रहे थे। सैकड़ों की उग्र भीड़ ने हमें दुश्मनों सरीखा घेर रखा था। ऐसे में एंबुलेंस चालक सरदार मुनिराज समय पर नहीं आता तो मेरी और मेरे साथ के स्वास्थ्य कर्मियों की मौत तय थी। बुधवार को करीब साढ़े बारह बजे का वक्त था। मैं अपनी मेडिकल और एंबुलेंस की टीम के साथ नागफनी थाना क्षेत्र के नवाबपुरा पहुंचा।
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पथराव करते हुए युवा
- फोटो : अमर उजाला
मुझे उस घर में जाना था जहां दो दिन पहले ही कोरोना संक्रमित की अस्पताल में मौत हुई थी। उसके फर्स्ट और सेकेंड संपर्क में आए 24 लोगों की सूची टीम को सौंपी गई थी।सभी को क्वारंटीन करके उनके सैंपल लिए जाने थे। टीम ने जैसे ही उसके परिवार के चार लोगों को एंबुलेंस में बैठाया, अचानक चारों तरफ से पत्थरों की बारिश शुरू हो गई।
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पथराव करतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। 24 लोगों की लिस्ट में मृतक के घर पर पहले संपर्क वाले सिर्फ उनके दो बेटे और भाई मिले। महिलाएं और बच्चे भी थे। लेकिन उनको दूसरे राउंड में ले जाने के लिए घर पर ही छोड़ दिया।
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रास्ते में पड़ीं ईंट और पत्थर
- फोटो : अमर उजाला
मृतक के घर के पास ही उनकी एंबुलेंस खड़ी थी। मृतक के घर में रुकने और एंबुलेंस तक पहुंचने में करीब सात से दस मिनट का वक्त लगा। एंबुलेंस में बैठने के बाद मृतक का भाई इमरान उतर गया और बोला घर में कोई सामान छूट गया है। सामान लेने घर चला गया और करीब चार मिनट बाद वापस एंबुलेंस की तरफ आ गया।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
इमरान के इंतजार में मैं और टीम के संजीव कुमार और अतरपाल एंबुलेंस के बाहर ही खड़े थे। इमरान आकर एंबुलेंस में बैठा भी नहीं था कि चारों तरफ से सैकड़ों लोगों ने टीम को घेर लिया। पथराव होने से संभलने का मौका तक नहीं मिला।
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पथराव के बाद का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
मुझे भी एक बड़ा सा पत्थर सिर के पास लगा। मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। किसी तरह खुद को संभाला। पथराव होने पर इमरान के साथ एंबुलेंस में बैठे दोनों बेटे भी भाग गए। सैकड़ों लोग कहां से आए, कुछ समझ नहीं आया। टीम के सभी लोग एंबुलेंस में बैठ गए।
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पथराव में क्षतिग्रस्त एंबुलेंस
- फोटो : अमर उजाला
मैं पथराव के बीच फंस गया। वहां अचानक एक बुजुर्ग आए और बचाकर पुलिस तक ले गए। टीम के साथ नागफनी थाने के आठ पुलिसकर्मी भी थे। भीड़ ने पुलिस पर भी पथराव शुरू कर दिया।
पुलिस कर्मी भी समझ नहीं पाए। एंबुलेंस चालक ने सभी घायलों को बैठाकर वहां से बाहर निकाला। इमरान के एंबुलेंस से उतरकर जाना और अचानक भीड़ का आना, पहले से प्लान था। परिवार को क्वारंटीन(एकांतवास) में ले जाने की पूर्व में थाने की ओर से सूचना दी गई थी। (पथराव में गंभीर रूप से घायल डा एससी अग्रवाल ने जैसा कि अमर उजाला को बताया)