तब सोशल मीडिया तो था नहीं। बस एक-दूसरे से कहकर ही आंदोलनों को आगे बढ़ाया जाता था। रोज दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र और दिल्ली के लोग प्रदर्शन करते थे कि रंगा-बिल्ला को फांसी दी जाए, क्योंकि 1978 में दिल्ली वालों को रंगा-बिल्ला की हैवानियत ने झकझोर दिया था। अब जब निर्भया के दोषियों को फांसी देने की तैयारियों पर चर्चा हो रही है, तो आज से 40 साल पुराना आंदोलनों का वो दौर याद आ रहा है। यह कहना है उस वक्त रामजस कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष धर्मपाल शर्मा का। जो संजय और गीता के कातिल रंगा और बिल्ला को फांसी पर चढ़वाने के लिए कॉलेजों के कैंपस से लेकर सड़कों तक आंदोलन करते थे।