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10वीं के छात्र की हत्याः ‘ज्ञान के मंदिर’ में कत्ल के बाद किताबों पर भी ‘फैला था खून’

Fri, 01 Jan 2021 06:59 PM IST
पूजा त्रिपाठी आशीष शुक्ला, अमर उजाला, बुलंदशहर

सार

- क्लास में छात्रों के बैग और अन्य सामान पड़े हुए थे तितर-बितर
- सीसीटीवी में कैद हुई वारदात, पुलिस ने डीवीआर कब्जे में ली
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bulandshahr student murder - फोटो : अमर उजाला
बुलंदशहर में ‘ज्ञान का मंदिर’ यानी ‘स्कूल’ जहां विद्या की देवी का वास माना जाता है। जहां से शिक्षा ग्रहण कर छात्र-छात्राएं अपने भविष्य को उज्जवल बनाना चाहते हैं। गुरुवार को शिकारपुर स्थित सूरजभान सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में हुई वारदात ने ज्ञान के मंदिर को खून से लथपथ कर दिया। जहां ज्ञान की गंगा बहती थी, उस क्लास रूम में छात्रों के बैग और अन्य सामान तितर-बितर था और किताबों पर खून फैला हुआ था। वारदात की भयावता वहां की स्थिति बयां करते नजर आई। 
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क्लास में बिखरी किताबें, घटनास्थल का मुआयना करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
शिकारपुर में गुरुवार को यह स्कूल अपने यथावत समय खुला था। छात्र सुबह 9.40 पर घंटी बजते ही अपनी-अपनी कक्षाओं में जा चुके थे। पहला पीरियड करीब 40 मिनट चला और दूसरे पीरियड के लिए 10.20 बजे घंटी बजी। इसके बाद फिर से कक्षाओं में अध्यापक बदल गए और तीसरे पीरियड के लिए सुबह करीब 11 बजे घंटी बजी सभी कक्षाओं में अध्यापक पहुंच चुके थे, लेकिन, कक्षा दस ‘ई’ में अध्यापक नहीं पहुंचे थे।
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टारजन के परिजन बिलखते हुए - फोटो : अमर उजाला
11 बजकर दो मिनट का समय बीत चुका था। अध्यापक के दो मिनट की देरी और उधर कक्षा में वारदात को अंजाम दे दिया गया। स्कूल और कक्षाओं का खुशनुमा माहौल गोली की तड़तड़ाहट से गूंजने लगा। कक्षा में अफरातफरी मच गई। अन्य छात्रों की चीखपुकार निकल गई और छात्र कक्षा से निकल कर भागने लगे। इस दौरान उनके बैग, किताब और अन्य सामान वहीं रह गया। कक्षा में सिर्फ मृतक छात्र लहूलुहान अवस्था में पड़ा हुआ था। उसकी किताबें खून से लथपथ हो चुकी थीं। कक्षा में अन्य छात्रों के बैग और अन्य सामान भी तितर-बितर हो चुका था। घटनास्थल पर अन्य अध्यापक पहुंचे तो वह भी देखकर सिहर उठे। 

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पूछताछ करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
स्कूल की कर दी गई छुट्टी
वारदात के बाद स्कूल की छुट्टी कर दी गई। बताया गया कि सुबह करीब 11.30 बजे स्कूल से बच्चों को घर भेज दिया गया था। जबकि, अध्यापकों ने आरोपी छात्र को पकड़ा हुआ था। स्कूल के बाहर लोगों और छात्रों की भीड़ जुटी हुई थी। साथ ही लोगों, अध्यापकों और छात्रों के बीच तरह तरह की चर्चाएं हो रही थीं। 
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मौके पर जमा भीड़ - फोटो : अमर उजाला
होनहार था मृतक छात्र 
जानकारी के अनुसार मृतक छात्र टारजन काफी होनहार था। कक्षा आठ तक वह अपनी कक्षा में टॉपर्स में रहता था। अब भी पढ़ाई करने में वह अच्छा था। अध्यापक भी उसके बारे में चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं। 
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टारजन के परिजन बिलखते हुए - फोटो : अमर उजाला
सिलेबस के साथ नैतिक शिक्षा हो जरूरी : डॉ. एमएल यादव 
जहांगीराबाद स्थित राजकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. एमएल यादव ने बताया कि इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि बच्चों के पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। पहले के दौर को देखा जाए तो सभी स्कूलों में नैतिक शिक्षा एक विषय के रूप में शामिल होता था। अब बच्चों के ऊपर सिलेबस इतना थोप दिया जाता है कि उसके जीवन में नैतिक मूल्यों का ह्रास होता जा रहा है। वर्तमान समय में बच्चे इंटरनेट आदि के माध्यम से अच्छी चीजों के साथ ही बुरी चीजों को भी देख और सीख रहे हैं। ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों को बिना पता लगे ही उनकी गतिविधियों पर नजर रखें। साथ ही आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम के अलावा बच्चों को पूरा समय दें। बच्चों से मित्रवत होकर उनकी बात सुनें और उनकी समस्याओं का समाधान करें। बच्चे यदि कोई गलत सवाल भी पूछ रहे हैं तो उन सवालों को पूछने से मना न करें, बल्कि उन सवालों को इस तरह से घुमा दें कि कोई पॉजिटिव उत्तर निकलकर सामने आए। क्योंकि आधुनिकता के इस दौर में आधा-अधूरा ज्ञान काफी खतरनाक हो सकता है। 
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अस्पताल के बाहर लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
बच्चे के अनुकूल बनाएं आसपास का माहौल : डॉ. स्वाति यादव 
आज के दौर में सोशल मीडिया के अलावा बहुत सारे ऑनलाइन प्लेटफार्म पर बहुत खराब कंटेंट आसानी से उपलब्ध हैं। इस समय बच्चों के पास पढ़ाई आदि करने का साधन मोबाइल है। ऐसे में बच्चे इन कंटेंट तक आसानी से पहुंच जा रहे हैं। साथ ही मोबाइल पर ऐसे बहुत सारे गेम्स भी हैं। जो बच्चों की मानसिकता पर काफी बुरा प्रभाव डालते हैं। ऐसे में पैरेंट्स को इस बात को खासा ध्यान रखना होगा कि उनके बच्चे मोबाइल पर क्या कर रहे हैं। किशोरावस्था में बच्चों पर आसपास के माहौल का पूरा असर पड़ता है। इसलिए अभिभावक और शिक्षक की यह जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह बच्चों को रील और रियल लाइफ के अंतर को समझाएं। इसलिए अभिभावक को चाहिए कि यदि बच्चा किसी खराब मनोस्थिति से गुजर रहा हो तो वह उसके साथ बात करें। आवश्यकता पड़ने पर बच्चे का किसी मनोचिकित्सक से काउंसिंलिंग भी कराएं। अक्सर परेशानी के दौर में लोग सोच में पड़ जाते हैं कि मनोचिकित्सक के पास जाएं या न जाएं। ऐसे में बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए संकोच न करें।
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