मासूम वंश और हार्दिक का शव घर पहुंचते ही दादी लिपटकर बिलखने लगी। कहने लगी कि मना किया था.. मत जा हरेंद्र, मेरा मन नहीं कर रहा है, लेकिन वह नहीं माना। कहने लगा, बाबा ने बुलाया है। परिवार के साथ दर्शन कर जल्द ही लौट आऊंगा। हादसे में हरेंद्र के दो मासूम बेटों, चचेरी बहन, एक दोस्त और एक साले की मौत हुई है।
हरेंद्र ने कुछ समय पहले ही परिवार, दोस्त और रिश्तेदारों के साथ केदारनाथ-बदरीनाथ जाने की योजना बनाई थी। हरेंद्र के पिता और चाचा की पहले ही मौत हो चुकी है। डर से मां ने यात्रा पर जाने से मना किया था लेकिन वह नहीं माना।