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ओवैसी पर हमला: जान लेना नहीं, यह था आरोपियों का मकसद, डेढ़ घंटे पहले ही टोल पर बना लिया था ठिकाना

Fri, 04 Feb 2022 09:23 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, पिलखुवा/हापुड़
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Owaisi Car Firing - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की कार पर फायरिंग के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। हमलावरों ने एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष व हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन औवेसी पर हमले के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। दोनों हमलावर युवक पहले से तैयार खड़े थे। ओवैसी का काफिला जैसे ही टोल प्लाजा पहुंचा, वे नजदीक आ गए। जैसे ही गाड़ियों की रफ्तार धीमी हुई, वैसे ही ओवैसी की कार पर गोली चला दी। फुटेज में नजर आ रहा है कि दोनों ने गोली कार के नीचे की तरफ ही चलाई। वे हमले के लिए ओवैसी के आने से डेढ़ घंटा पहले पहुंचे थे। पिलखुवा थाना में घटना की रिपोर्ट ओवैसी के ड्राइवर यामीन ने दर्ज कराई गई। इसमें बताया गया कि वे लोग मेरठ से दिल्ली जा रहे थे। कुछ लोगों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। पुलिस ने अज्ञात में जानलेवा हमले का केस दर्ज किया गया।

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गोली चलाता हुआ आरोपी - फोटो : अमर उजाला
हमलावरों में से सचिन को मौके से पकड़ा गया जबकि शुभम की गिरफ्तारी गाजियाबाद से सिंहानी गेट से बताई जा रही है। दोनों ने पूछताछ में कई बार अपने नाम बदले। बाद में सचिन और शुभम बताए। सचिन बीमा एजेंट और शुभम पेशे से किसान है। 
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हमलावर - फोटो : अमर उजाला
उधर, यामीन ने बताया कि दोनों हमलावरों ने गोलियां चलाई। काफिले की दूसरी कार में मौजूद बाबा ने बताया कि उन्होंने ही हमलावर को पकड़ा।

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आरोपी सचिन - फोटो : अमर उजाला
फेसबुक पर दोस्ती,  फोन पर रची साजिश
सचिन ने पूछताछ में बताया कि शुभम से उसकी दोस्ती फेसबुक पर हुई। इसके बाद फोन पर बातें होने लगीं। फोन पर ही हमले की साजिश तैयार की। दोस्तों से पिस्तौल ली। हमले से पहले दोनों मिले और कार से टोल प्लाजा पर पहुंच गए।


 
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कार पर गोलियों के निशान - फोटो : अमर उजाला
पहले लगा धमाका हुआ, फिर समझे फायरिंग
औवेसी ने घटनास्थल से जाने के बाद एएसपी को फोन किया। उन्हें पूरा घटनाक्रम बताया। उन्होंने कहा कि वह पहले समझे की आस-पास कोई धमाका हुआ है। दूसरी गोली चलने पर अहसास हुआ कि फायरिंग हो रही है। निशाना उनकी कार ही थी। इसके बाद ओवैसी ने घटना के बारे में ट्वीट किया।
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सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ संदिग्ध हमलावर - फोटो : अमर उजाला
चार गोलियां चलीं, तीन के निशान मिले
देर शाम पहुंची फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने जांच पड़ताल के बाद पुलिस को जानकारी दी। इसमें बताया कि कुल चार गोलियां चलाई गई। जिस कार में ओवैसी थे, उस पर गोली लगने के तीन निशान मिले हैं। इनमें दो टायरों के पास हैं।
 
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सीसीटीवी फुटेज में देखा गया हमलावर (काले घेरे में) - फोटो : अमर उजाला
हमलावर को कार से मारी टक्कर
हमलावरों में से एक ने सफेद शर्ट पहन रखी थी। दूसरे ने हुड वाली जैकेट जो लाल रंग की थी। जैकेट वाला हमलावर भागा नहीं था। ओवैसी के आगे चल रही कार के ड्राइवर ने उसे देखा तो टक्कर मार दी। इससे वह गिर पड़ा। इसके बाद उसे पकड़ा गया। उसके हाथ में पिस्तौल थी। इसे छीन लिया गया।

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आरोपी सचिन - फोटो : अमर उजाला
हम  किसी दल के कार्यकर्ता नहीं
पुलिस पूछताछ में सचिन और शुभम ने बताया कि वे किसी दल के कार्यकर्ता नहीं है। असदुद्दीन ओवैसी से ज्यादा नाराजगी उनके भाई अकबरुद्दीन से है। काफी दिन से हमला करने की सोच रहे थे। उनका इरादा ओवैसी की जान लेने का नहीं, बल्कि यह संदेश देना था कि नफरत की राजनीति छोड़ दें। ओवैसी को नुकसान न हो, इसलिए गोली कार के निचले हिस्से में चलाई थी।

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हमले के बाद ओवैसी - फोटो : एएनआई
चार गाड़ियों के काफिले में थे ओवैसी
ओवैसी मेरठ से चार गाड़ियों के काफिले में निकले थे। दो उनके पीछे थीं। एक आगे। वह कार में आगे वाली (ड्राइवर के बराबर में) सीट पर बैठे थे। इसी कार में उनकी पार्टी के यूपी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली थे। हमलावरों ने इसी कार को निशाना बनाकर गोली चलाई।

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Owaisi Car Firing - फोटो : अमर उजाला
समर्थकों का गुस्सा फूटा
ओवैसी पर हमले की खबर जंगल में आग की तरह फैली। देखते ही देखते बड़ी संख्या में उनके समर्थक पहुंच गए। उन्होंने पुलिस पर सवालों की बौछार कर दी। उनका कहना था कि पास में ही पुलिस चौकी है, फिर हमला कैसे हो गया? 
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असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : ANI
चुनाव के समय ही क्यों किया हमला
1. पुलिस कई सवालों के जवाब ढूंढ रही है। सबसे अहम यह है कि हमलावरों को कैसे पता चला कि ओवैसी टोल प्लाजा से होकर गुजरेंगे?
2. हमलावरों ने पूछताछ में यह भी नहीं बताया कि उन्हें ओवैसी के टोल प्लाजा पर पहुंचने के समय की जानकारी किससे मिली?
3. साजिश से भी पर्दा नहीं उठा है, पुलिस यह भी पूछ रही है कि उनके पास हमले के लिए पिस्तौल कहां से आईं?
4. सवाल हमले की टाइमिंग पर भी उठ रहा है, आखिर यह विधान सभा चुनाव के समय ही क्यों किया गया?
5. दोनों हमलावरों का आपस में लिंक भी पुलिस तलाश रही है, सवाल ये भी है कि उन्होंने शुरू में अपना नाम -पता गलत क्यों बताया?
 
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