नोएडा की 28वीं पुष्प प्रदर्शनी के आगाज के साथ ही नोएडा स्टेडियम रंग-बिरंगे फूलों से महक उठा। शुक्रवार शाम चार बजे ब्रिगेडियर चितरंजन सावंत ने इसका उद्घाटन किया।
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80 साल का बोनसाई बना आकर्षण
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इस मौके पर ब्रिगेडियर चितरंजन सावंत ने माखन लाल चतुर्वेदी की कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ की पंक्ति ‘मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर तुम देना फेंक। मातृभूमि पर शीष चढ़ाने, जिस पथ जाएं वीर अनेक’ लोगों को सुनाई।
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फूलों की इस प्रदर्शनी में पैंजी को थीम फ्लॉवर बनाया गया है और यहां 45 प्रजातियों के 3500 पुष्प लगाए गए हैं। लोगों को विभिन्न डिजाइनों में लगे फूल लुभा रहे हैं, तो 84 साल का बोनसाई लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।
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फ्लॉवर शो से पहले आयोजित गार्डन कॉम्पटीशन में सेक्टर 93 स्थित व्यू पार्क को नोएडा के सर्वश्रेष्ठ पार्क का दर्जा मिला है। सर्वश्रेष्ठ रोड साइड ग्रीनरी के लिए सेक्टर 44 और सेक्टर 33 के ग्रीन बेल्ट को सर्वश्रेष्ठ ग्रीन बेल्ट का दर्जा मिला है।
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पैंजी के उपयोग को देखते हुए विलियम शेक्सपियर ने इसे ‘हनी फ्लावर’ के नाम से पुकारा था। पैंजी शब्द फ्रेंच भाषा का है, जिसका अर्थ होता है- विचार। इसका पौधा एक साल में बड़ा होकर फूल देने लगता है, लेकिन बीज दूसरे साल आते हैं। फूल सहित पौधे की लम्बाई 23 सेंटीमीटर होती है।
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यह प्रमुख रूप से यूरोप, दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया में पाया जाता है। पैंजी के लिए ठंड का मौसम अनुकूल होता है। नेचुरोपैथी में इलाज के लिए पैंजी को दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है।
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वीकेंड पर फूलों की रंग विरंगी दुनियां में आए लोगों को इन मनोहर पुष्प गुच्छों ने मंत्रमुग्ध कर दिया।
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फूलों की खास प्रदर्शनी में प्रदर्शनी में यह 50 साल का बोनसाई लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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वहीं एक तरफ रखा 80 साल का बोनसाई लोगों की जिज्ञासा ही नहीं जगा रहा है बल्कि सबको अचंभित भी कर दे रहा है।
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चूंकि इस शो की थीम ही पैंजी फ्लॉवर है, इसलिए प्रदर्शनी में फूलों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी होने वालों को ध्यान में रखकर भी लोग वहां भारी संख्या में पहुंच रहे हैं।
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दरअसल पैंजी के लिए ठंड का मौसम अनुकूल होता है। नेचुरोपैथी में इलाज के लिए पैंजी को दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है।
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शायद इसीलिए महान लेखक विलियम शेक्सपियर ने पैंजी को ‘हनी फ्लावर’ के नाम से पुकारा था।