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मार-पीट के बीच किसी तरह बच के निकले कुमार विश्वास

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डीएवी कॉलेज में शनिवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (सीटा) के अधिवेशन में पहुंचे आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास को ज्ञापन देने को लेकर छात्र गुटों आपस में भिड़ गए। दोनों गुटों में जमकर लात-घूंसे चले और छात्र नेताओं ने एक दूसरे को हेलमेट से मारा गया। मारपीट से कार्यक्रम में अफरातफरी मच गई। पुलिस ने झगड़ा करने वालों को हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में कोतवाली में दोनों गुटों के बीच समझौता हो गया और पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।
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मार-पीट के बीच किसी तरह बच के निकले कुमार विश्वास

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अधिवेशन के दौरान कुमार विश्वास को छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राहुल सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष अमरपाल लोधी और केपी सिंह कॉलेज प्राचार्य डा. विकास शर्मा (कुमार विश्वास के भाई) के खिलाफ 38 पेजों की शिकायत का ज्ञापन देने लगे। दूसरे पक्ष के पूर्व सचिव प्रशांत गुर्जर सहित अन्य छात्र नेताओं ने इसका विरोध किया। इसे लेकर केपी सिंह और प्रशांत गुट भिड़ गए।
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मार-पीट के बीच किसी तरह बच के निकले कुमार विश्वास

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काफी समय तक झगड़ा होता रहा। कुमार विश्वास इस दौरान मंच पर खड़े रहे। झगड़े को शांत करने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन मारपीट होने लगी। हंगामे और मारपीट की सूचना पर पुलिस पहुंच गई लेकिन दोनों गुट एक दूसरे को धमकी देते हुए भाग गए।

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पुलिस ने बाद में  प्रशांत गुर्जर सहित उसके छह साथियों को हिरासत में ले लिया। कुछ देर बाद अमरपाल लोधी अपने दो साथियों के साथ शिकायत करने थाने पहुंचे तो पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। बाद में दोनों पक्षों ने समझौता हो गया। अमरपाल गुट ने विवाद में प्राचार्य हाथ होने का आरोप लगाया है। प्रशांत गुर्जर गुट भाजपा से जुड़ा है।
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मार-पीट के बीच किसी तरह बच के निकले कुमार विश्वास

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आम आदमी पार्टी के नेता एवं कवि डा. कुमार विश्वास ने कहा कि आज शिक्षा और गुरु दोनों बदल गए हैं। दूसरे विभागों की तरह देश में शिक्षा मंत्रालय की जरूरत है। इसी से शिक्षा में गुणवत्ता और देश की राजनीति को अच्छे नेता मिलेंगे। कुमार विश्वास शनिवार को डीएवी में सीटा के अधिवेशन और सेमिनार के समापन समारोह में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करने पहुंचे थे।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि जब तक हम संस्कृत और हिंदी में साहित्य नहीं लिखेंगे तब तक बौद्ध से नहीं जुड़ सकते। इसके लिए गुरु और शिष्य की बढ़ती दूरी जिम्मेदार है। शिक्षकों को चाहिए कि वह शिष्यों को अच्छी शिक्षा दें और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। इसके लिए हमें खुद पहल करनी होगी।
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