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दिल्ली: ऐसा भयानक मंजर पहले कभी नहीं देखा, जल रहीं थीं 50 चिताएं और अन्य के लिए 20 घंटे की वेटिंग

Wed, 28 Apr 2021 04:57 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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दिल्ली के श्मशान घाट में जलती चिताएं - फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर राजधानी दिल्ली पर कहर बनकर टूट रही है। बेतहाशा तरीके से बढ़ी मरीजों की संख्या के चलते कहीं ऑक्सीजन की कमी से तो कहीं वेंटिलेटर नहीं मिलने के कारण सैकड़ों लोगों की जान जा रही है। ऐसा भयावह मंजर पहले कभी नहीं देखा कि श्मशान घाट के अंदर शवों के अंतिम संस्कार के लिए 20 घंटे की वेटिंग हो।
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दिल्ली के श्मशान घाट में जलती चिताएं - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित मेस्सी अंतिम संस्कार केंद्र में कुछ इसी तरह के हालात थे। यहां पर टीन शेड के नीचे बने प्लेटफार्मों पर 50 चिताएं जल रही थीं। जबकि अंतिम संस्कार केंद्र के आस-पास, फर्श पर शव लावारिस अवस्था में पड़े हुए थे। यहां की पार्किंग में अंतिम संस्कार के लिए आए परिजनों के वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी।
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श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाते हुए - फोटो : अमर उजाला
मेस्सी अंतिम संस्कार केंद्र की मालिक विनीता मेस्सी ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहले कभी ऐसा भयानक मंजर नहीं देखा। जब लोग अपने परिजनों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। दिल्ली के करीब सभी श्मशान घाटों के अंदर शवों को जलाने के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों को मानें तो इस महीने 3601 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। जिसमें से केवल सात दिन के भीतर 2267 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। दिल्ली में मौत के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
पश्चिमी दिल्ली के अशोक नगर के एक युवा व्यवसायी अमन अरोड़ा ने सोमवार को अपने पिता एम. एल. अरोड़ा को दिल का दौरा पड़ने से खो दिया। अमन अरोड़ा ने बताया कि जब उनके पिता को सीने में तकलीफ महसूस हुई तो वह उनको लेकर कई तो निजी अस्पतालों में गए। लेकिन अस्पतालों ने उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया। आखिरकार उनकी जान चली गई।
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कोरोना का कहर - फोटो : पीटीआई
अमन की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। जब वह सोमवार को अपने पिता का शव अंतिम संस्कार करने के लिए पश्चिमी दिल्ली के सुभाष नगर श्मशान घाट पर पहुंचे, तो वहां पता चला कि अंतिम संस्कार के लिए लंबी वेटिंग है। उन्हें अंतिम संस्कार के लिए मंगलवार का समय दिया गया। लेकिन उन्हें डर था कि तब तक पिता के शव में सड़न शुरू हो सकती है। इसलिए उन्होंने अपने पिता के शव को सड़ने से रोकने के लिए किराए पर रेफ्रिजिरेटर की व्यवस्था की। वह मंगलवार को श्मशान घाट पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
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