अपनी बड़ी बहन सहित पांच महिलाओं को क्रेन से नीचे उतरने का हौंसला देने वाली मधु खुद को नहीं बचा सकी। जिंदगी से जूझती महिला कर्मी ने एक बार क्रेन से नीचे उतरने की कोशिश भी की, लेकिन चंद सेकेंड की देरी में क्रेन आगे निकल गई और मधु आग की लपटों के बीच फंस गई। 24 घंटे से भी अधिक वक्त से अपनी पत्नी की तलाश में अमित के पांव तो थक गए, लेकिन आंखों को मधु को देखने का बेसब्री से इंतजार है। घर में दो बेटियां और सास की आंखों के आंसू थम नहीं रहे हैं। आग के तांडव के बीच जिंदगी की उम्मीद भी कम हो गई है। पेशे से ड्राइवर अमित ने बताया कि उसकी पत्नी पिछले कुछ दिनों से शादी की 11वीं सालगिरह की तैयारी कर रही थी। शुक्रवार सुबह अपनी ड्यूटी के लिए जाते हुए बेहद खुश थी। सास आशा देवी ने बताया कि मेरी बहू अपनी सालगिरह की तैयारियां कर रही थी। सभी के कपड़े खरीदे और बताया था कि मैं 20 मई को सरारा पहनूंगी।
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मधु का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
2011 में मधु और अमित की शादी हुई थी। दो बेटियां राधा (आठ वर्ष) और प्रिया (4 वर्ष) की आंखे अपनी मां मधु को खिड़कियों से तलाश रही हैं। आंखों से लगातार गिरते आंसुओं को पोंछने वाली दादी भी लगातार रो रही है।
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Delhi Mundka Fire
- फोटो : अमर उजाला
अमित ने बताया कि अस्पताल में भी कोई सुराग नहीं मिलने पर इस मामले की शिकायत पुलिस से की तो मधु की मां को डीएनए टेस्ट के लिए बुलाया गया है। अमित ने बताया कि मधु की मां पटना से रविवार को दिल्ली पहुंचेंगी। पिछले 24 घंटे से पत्नी की कोई खबर न मिलने से अब उम्मीद भी जवाब देने लगी है।
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बकौल अमित शुक्रवार दोपहर बाद रोजाना की तरह करीब दो बजे लंच के वक्त बात हुई थी। उसने बच्चों के स्कूल से घर पहुंचने के बारे में पूछा और यह भी कहा कि आपने अब तक खाना क्यों नहीं खाया। अमित ने बताया कि अपनी ड्यूटी के सिलसिले में ओखला गया था, लेकिन माल अनलोड करने के दौरान ही कई फोन आए और आग लगने की सूचना मिली।
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तत्काल वहां से लौटने लगे, लेकिन जब तक मुंडका पहुंचे, आग की चपेट में आकर इमारत खंडहर बन चुका था। हर तरफ आग और धुएं के बीच एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां नजर आ रही थी। सड़क पर वाहनों का भारी जाम होने की वजह से घटनास्थल तक पहुंचने में देरी हुई।
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केवल लंच के वक्त होती थी बच्चों और पति से बातचीत
रोजाना अपनी बेटियों को स्कूल से घर तक लाने के लिए मधु ने एक कर्मी की ड्यूटी लगा दी थी। बच्चों से रोजाना लंच के वक्त ही बात होती थी, क्योंकि बाकि समय में मोबाइल जमा कर लिए जाते थे। उसी आधे घंटे के दौरान खाना खाते हुए अपने पति और बच्चों से बात करती थी।
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मधु के पति ने बताया कि पिछले करीब एक-डेढ़ महीने से सभी कर्मियों से मोबाइल जमा करवा लिए जाते थे। केवल लंच के वक्त में बातचीत की छूट होती थी।
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बहन और दोस्तों की बचाई जिंदगी, खुद क्रेन में सवार होने से चूक गई
अमित ने बताया कि घटना के दौरान नीले रंग के सूट में मधु ने एक बार क्रेन से उतरने की कोशिश भी की। लेकिन अपनी बड़ी बहन जूसी के साथ मौजूद चार कर्मियों की हालत को देखकर मधु ने उन्हें पहले क्रेन से उतरने को कहा। उसने यह भी कहा कि तुम उतर जाओ, मैं तुरंत आ रही हूं।
बदकिस्मती इतनी की क्रेन में सवार होने के मधु ने पैर बढ़ाए भी, फिर क्रेन नीचे उतर गई। मधु उसी आग के धुएं के बीच झुलस गई और उसका कोई सुराग नहीं है। पति ने कहा कि मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि आखिरकार क्रेन से खुद नीचे क्यों नहीं उतर सकी। चंद मिनट की देरी ने मधु को उनसे दूर कर दिया। पति ने कहा कि पिछले 24 घंटे में भी कोई जानकारी नहीं मिली और अब उम्मीद भी टूट रही है।