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खबर जो खो गई: निठारी कांड की वो 'खूनी कोठी' और बच्चों पर बेइंतहा जुल्म

Wed, 15 May 2019 05:46 PM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Surinder Koli
आज हम आपको एक ऐसी खबर के बारे में बताने जा रहे हैं जो खो गई है। जी हां, ऐसी खबर जिसे जानने के बाद लोगों की रूह कांप जाती है। ये कहानी है निठारी कांड की...। इस मामले के दोषी को 11वें मामले में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। 31 अक्तूबर 2006 को घरों में साफ-सफाई का काम करने वाली महिला अपने घर से चलते समय पति को बताकर गई थी कि आज उसे सुरेंद्र कोली ने बुलाया है। इसलिए वह पंधेर की कोठी संख्या डी-5 पर काम की बात करने जाएगी। अगली स्लाइड पढ़ें कहानी का अंत...
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Surinder Koli
इसके बाद से उसका कुछ पता नहीं चला। 24 दिसंबर 2006 को जब ‘खूनी कोठी’ के पीछे नाले से पुलिस ने 16 मानव खोपड़ियां बरामद कीं तो प्रयोगशाला जांच के बाद पता चला कि उनमें से एक खोपड़ी उक्त लापता महिला की भी थी।
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Surinder Koli
निठारी प्रकरण के मामलों में अभियोजन की ओर से पैरवी करने वाले सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया था कि महिला पहले भी पंधेर की इस कोठी पर झाडू-पोंछे का काम करती थी, मगर बाद में प्रेग्नेंसी के चलते उसने काम छोड़ दिया था। बच्चे को जन्म देने के कुछ माह बाद वह दोबारा इस कोठी पर काम करना चाहती थी।

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Surinder Koli
सुरेंद्र कोली ने उससे बात भी की थी। इसी के चलते वह काम की बात करने डी-5 पर गई और फिर कभी लौटकर नहीं आई। 29 दिसंबर 2006 को निठारी कांड खुलने के बाद आरोपी कोली ने कोठी के पीछे गैलरी से भी काफी सामान बरामद कराया था। इसमें कपडे़, चप्पल, जूते आदि शामिल थे।
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Surinder Koli
इसमें एक साड़ी वह भी बरामद हुई थी, जिसे घटना वाले दिन लापता महिला पहनकर घर से निकली थी। यह साड़ी उसे पास के ही एक दूसरी कोठी में रहने वाली महिला ने पहनने के लिए दी थी। डीएनए टेस्ट से चूंकि लापता महिला की सटीक जानकारी नहीं मिल सकी थी, ऐसे में उसका एक फोटो और बरामद खोपड़ियां चंडीगढ़ सीएफएसएल भेजी गईं। फोटो के सुपर इंपोजिकल ऑफ इस्कल टेस्ट के बाद फोरेंसिक एक्सपर्टस ने एक खोपड़ी को लापता महिला की खोपड़ी करार दिया था। सुरेंद्र कोली को 11वें मामले में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।
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पंधेर की कोठी - फोटो : राजन राय/अमर उजाला
निठारी कांड के कुछ महत्वपूर्ण प्वाइंट
- अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में कोर्ट के समक्ष कुल 50 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए थे।
- बचाव पक्ष की ओर से भी एक गवाह सफाई कर्मचारी इशरत की गवाही कोर्ट में हुई थी।
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file - फोटो : अमर उजाला
देश भर में मची थी हलचल
निठारी कांड के खुलते ही देश भर में हलचल मच गई थी। यह एक ऐसा कांड था, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग देश के लिए कोने-कोने से आवाज उठी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई ने शुरू की। 11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने पूरा केस अपने हाथ में ले लिया। 28 फरवरी और 01 मार्च 2007 को सुरेंद्र कोली ने दिल्ली में एसीएमएम के यहां अपने इकबालिया बयान दर्ज कराए थे। इन बयानों की वीडियोग्राफी भी हुई थी।

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nithari case - फोटो : अमर उजाला
सुरेंद्र कोली के पेश होते ही कोर्ट ने दिया दोषी करार
निठारी कांड के इस मामले के फैसले की घड़ी की जानकारी आम जनता को भी थी। इसी के चलते सीबीआई विशेष कोर्ट की सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। पुलिस के साथ ही पीएसी जवानों को भी यहां सुरक्षा में तैनात किया गया था।
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nithari case - फोटो : अमर उजाला
सुबह करीब ग्यारह बजे जैसे ही डासना जेल से पुलिसकर्मी आरोपी कोली को लेकर कोर्ट में पेश हुए, वैसे ही इस मामले की सुनवाई शुरू कर दी गई। चूंकि मामले की सुनवाई की सभी औपचारिकताएं पूर्व की तारीखों में ही पूरी की जा चुकी थीं, ऐसे में विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने कोली को हत्या, अपहरण और रेप का दोषी करार दे दिया और आज फांसी की सजा दे दी है।
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