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14 दिन और 14 तस्वीरें: कब सुरंग से आएगी खुशखबरी? हर आहट पर धड़क रहा दिल...बेबस मजदूरों को अब सता रहा ये गम

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सिलक्यारा में सुरंग के पास बैठी महिला - फोटो : एजेंसी
हर आहट पर दिल धड़क रहा है....छोटी सी उम्मीद दिखते ही चेहरे खिल जाते, लेकिन फिर कुछ पल में ही मायूसी छा जाती। हर दिन का सवेरा एक उम्मीद लेकर आता, लेकिन फिर शाम होते-होते उम्मीद टूट रही। इस सिलसिले को आज 14 दिन हो गए।

उत्तरकाशी की सुरंग में कैद 41 मजदूर अपनी आजादी का इंतजार कर रहे हैं। सुरंग में हल्की सी भी हलचल होती तो उन्हें अपने बाहर निकलने की उम्मीद दिखती, लेकिन पल भर में ही उनका ये भ्रम टूट जाता। सुरंग के अंदर फंसे 41 मजदूर जहां बाहर निकलने को बेकरार हैं, वहीं बाहर उनके परिजनों को भी खुशखबरी का इंतजार है। 

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में दिवाली वाले दिन भूस्खलन हुआ था। रात्रि शिफ्ट में सुरंग के अंदर गए मजदूर ढाई घंटे बाद शिफ्ट खत्म कर बाहर आने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही साढ़े पांच बजे भारी भूस्खलन हो गया और वहां काम कर रहे 41 मजदूर अंदर फंसकर रह गए।

उसी दिन से रेस्क्यू ऑपरेशन किया जा रहा है, लेकिन कब तक मजदूर बाहर आ जाएंगे इस बारे में राहत एवं बचाव अभियान से जुड़े एनएचआईडीसी और जिला प्रशासन के अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। मजदूरों को अंदर फंसे 14 दिन हो गए हैं। सुरंग के भीतर लगातार चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच बृहस्पतिवार की देर रात व शुक्रवार की अलसुबह एक खबर ने उत्साह और बढ़ाया
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सिलक्यारा में बैठे परिजन - फोटो : अमर उजाला
पाइप व लोहे के गर्डर को जब गैस कटर से काटा जा रहा था तो उसके धुएं की खुशबू सुरंग के भीतर फंसे 41 मजदूरों तक पहुंच गई। जैसे ही मजदूरों को गैस कटर के धुएं की खुशबू आई तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा।
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सिलक्यारा में सुरंग - फोटो : अमर उजाला
ये धुआं आगे से मुड़े हुए 800 मिमी के पाइप को काटने के दौरान उठा। मजदूरों ने तत्काल कम्युनिकेशन सिस्टम के माध्यम से बाहर काम कर रहे बचाव दल को इसकी जानकारी दी।

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सिलक्यारा में सुरंग - फोटो : अमर उजाला
उन्हें लग गया कि अब पाइप उनके करीब पहुंच चुका है, क्योंकि ज्यादा दूरी होती तो धुएं की खुशबू मलबे को चीरकर आगे न बढ़ पाती। बचाव दल में जुटे अधिकारियों ने बताया कि धुएं की खुशबू से ये अनुमान लगा लिया गया है कि अब मंजिल ज्यादा दूर नहीं है। खुद भीतर कैद मजदूर भी इससे उत्साहित हो गए हैं।
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सुरंग के बाहर परेशान परिजन। - फोटो : amar ujala
सुरंग में फंसे अधिकांश मजदूर झारखंड, उत्तरप्रदेश व बिहार से हैं। जो कि दिवाली से अधिक छठ पर्व धूमधाम से मनाते हैं। दीपावली पर तो मजदूर बाहर नहीं आ सके, ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि छठ पर्व से पहले रेस्क्यू पूरा कर मजदूरों को बाहर निकाल लिया जाएगा, लेकिन शुक्रवार से छठ पर्व शुरू हो गया है और अभी तक मजदूर अंदर ही फंसे हैं।
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सुरंग के बाहर परेशान परिजन - फोटो : amar ujala
सुरंग निर्माण कंपनी से जुड़े मजदूर हेमंत नायक, कुंवर बहादुर, जगन्नाथ व आदित्य का कहना है कि जब उनके साथी अंदर फंसे हैं तो छठ पर्व का उल्लास कैसा। उन्होंने अपने सभी साथियों के जल्द से जल्द बाहर निकलने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
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सुरंग के अंदर फंसे लोगों को जानकारी परिजनों को देता श्रमिक। - फोटो : amar ujala
सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए अमेरिकी ऑगर मशीन शुक्रवार शाम 24 घंटे बाद चली, लेकिन फिर लोहे का अवरोध आने से रुक गई। जिससे एक बार फिर मजदूरों के बाहर निकलने का इंतजार बढ़ गया।

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सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू जारी - फोटो : amar ujala
अब तक मलबे में करीब 47 मीटर ही पाइप पहुंच पाया है। अधिकारियों के मुताबिक अभी करीब 9 मीटर का सफर बाकी है।

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सुरंग में मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश जारी। - फोटो : amar ujala
एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि मशीन चलने से हो रहे कंपन के कारण सतह का संतुलन बिगड़ रहा है। जिससे मलबा गिरने का खतरा है। इसी लिए बीच में काम रोकने का निर्णय लिया गया है।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सुरंग में फंसे मजदूरों से बात करते। - फोटो : amar ujala
इन सब के बीच यमुनोत्री हाईवे के निकट छोटे से गांव सिलक्यारा को सुरंग हादसे ने बड़ी पहचान दी है। हादसे के बाद गुमनाम सा यह गांव देश-विदेश की सुर्खियां में रहा।

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इंतजार में बैठे श्रमिक। - फोटो : amar ujala
हैशटैग उत्तरकाशी रेस्क्यू से इस हादसे को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर अब तक चार हजार से ज्यादा पोस्ट की जा चुकी हैं, जबकि गूगल पर उत्तराखंड टनल लेटेस्ट न्यूज कीवर्ड से इस हादसे से जुड़ी खबरों को 13 दिन में 20 हजार से अधिक बार सर्च किया गया है। 

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सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू जारी - फोटो : amar ujala
पिछले 14 दिनों से सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने लिए केंद्र व राज्य की करीब 19 एजेंसियां रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। देशभर से कई बड़ी मशीनें यहां ड्रिलिंग और बोरिंग के लिए पहुंचाई गईं।

 

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Uttarkashi Tunnel Collapse - फोटो : एएनआई
देश के कई बड़े वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञ भी सिलक्यारा पहुंचे। वहीं, विदेशी एक्सपर्ट भी बुलाए गए। हादसे के रेस्क्यू ऑपरेशन को कवर करने के लिए देश-विदेश के तमाम बड़े मीडिया संस्थान सिलक्यारा पहुंचे।

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उत्तरकाशी टनल में फंसे मजदूर - फोटो : amar ujala
इसके अलावा राज्य व केंद्र के कई बड़े अफसरों के साथ मंत्री भी यहां पहुंचे। सोशल मीडिया पर नजर डालें तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हैशटैग उत्तरकाशी रेस्क्यू से शुक्रवार शाम तक 4,972 पोस्ट हो चुकी हैं। वहीं, गूगल पर उत्तराखंड टनल लेटेस्ट न्यूज कीवर्ड को 20 हजार से ज्यादा लोगों ने खोजा है।
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