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गजब: यहां बंदरों से श्रद्धालुओं की सुरक्षा करते हैं लंगूर, 35 लंगूरों के झुंड का मुखिया बंटी, तस्वीरें...

Mon, 09 Aug 2021 10:37 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार
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प्राचीन श्री दक्षिणकाली मंदिर क्षेत्र में लंगूरों का झुंड - फोटो : अमर उजाला
बंदरों के करतब तो बहुत देखे होंगे, लेकिन लंगूरों की समझदारी शायद ही देखी और सुनी होगी। हरिद्वार स्थित प्राचीन श्री दक्षिणकाली मंदिर क्षेत्र में बेहद ही समझदार लंगूरों का झुंड है। लंगूर उत्पाती बंदरों से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनके सामान की पहरेदारी तक करते हैं। लंगूरों के झुंड का मुखिया बंटी है। बंटी की तरह अधिकतर लंगूरों के इंसानों की तरह नाम रखे हैं। नाम पुकारते ही पेड़ों से उतरकर दौड़े आते हैं। लंगूरों की पहरेदारी से बंदर आसपास तक नहीं भटकते हैं। सावन में मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रहने से लंगूर भी जमकर दावत उड़ा रहे हैं। आमतौर पर जिस इलाके में लंगूर होते हैं वहां बंदर नहीं दिखते। उत्पाती बंदरों से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए कई लोग लंगूर पालते हैं। बंदर की तरह ही लंगूर बेहद समझदार होता है। लंगूर सीधे हमला नहीं करता है। बंदर की तुलना में लंगूर अधिक फुर्तीला और ताकतवर होता है। इसलिए बंदर उससे डरते हैं। लंगूर के इलाके में नहीं जाते। हरिद्वार में अधिकतर इलाकों में बंदरों का आतंक है। बंदर घरों में घुसकर सामान तक उठा ले जाते हैं। भगाने पर काटने आते हैं। 
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प्राचीन श्री दक्षिणकाली मंदिर क्षेत्र में लंगूरों का झुंड - फोटो : अमर उजाला
अधिकतर मंदिरों और आश्रम के आसपास उत्पाती बंदर दिख जाते हैं। प्राचीन श्री दक्षिणकाली मंदिर जंगल से सटा है। मंदिर क्षेत्र में बंदरों के आतंक से श्रद्धालुओं को लंगूर बचाते हैं। मंदिर के आसपास 35 लंगूरों का झुंड है। बीते कई सालों से लंगूर मंदिर के आसपास ही रहते हैं। श्रद्धालु उनको केले और दूसरे फलों के अलावा बिस्कुट व चने खिलाते हैं। मंदिर के आसपास कई दुकानें और फलों के ठेले लगते हैं। लंगूर ठेलों की पहरेदारी तक करते हैं।
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प्राचीन श्री दक्षिणकाली मंदिर क्षेत्र में लंगूरों का झुंड - फोटो : अमर उजाला
फलों की ठेली लगाने वाली फूलवती बताती हैं ठेली और दुकान वालों से लंगूर घुल मिल गए हैं। दिनभर पेड़ों की डाल पर बैठे रहते हैं। कभी नुकसान नहीं करते हैं। श्री दक्षिण काली मंदिर और चंडी देवी मंदिर पैदल मार्ग से आने जाने वाले श्रद्धालुओं का बंदर कई बार सामान छीन लेते हैं। भगाने पर दांत लगा देते हैं। बंदरों के उत्पाद को देख पेड़ों में बैठे लंगूर उनको खदेड़ देते हैं। 

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प्राचीन श्री दक्षिणकाली मंदिर क्षेत्र में लंगूरों का झुंड - फोटो : अमर उजाला
फूलवती बताती हैं एक दशक से वह लंगूरों को देख रही है। उसने ही लंगूरों के नाम रखे हैं। बंटी झुंड का मुखिया है। सोनू, मोनू, बबली और रामू जैसे हर लंगूर का नाम रखा है। फूलवती की पोती कोमल बताती हैं लंगूर सुबह, दोपहर और शाम को सड़क पर आ जाते हैं। तीनों टाइम उनको भूख लगती है। श्रद्धालुओं की ओर से खाने देने पर सब्र से बैठे रहते हैं। आवाज देने पर ही आते हैं।
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प्राचीन श्री दक्षिणकाली मंदिर क्षेत्र में लंगूरों का झुंड - फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालुओं के हाथ से फल पकड़ने के बाद खाकर पेड़ पर चले जाते हैं। लंगूर कभी कभार जंगल की तरफ चले जाते हैं। उनकी गैरमौजूदगी में बंदर पहुंच जाते हैं। बंदरों की श्रद्धालुओं से सामान की छीनाझपटी करने पर लंगूरों के नाम पुकारते ही दौड़कर आ जाते हैं।
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