10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण लागू करने सहित नौ सूत्री मांगों को लेकर प्रदेशभर के राज्य आंदोलनकारियों ने राजधानी में हल्ला बोला। बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री आवास की ओर से बढ़ रहे आंदोलनकारियों को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्कामुक्की व नोकझोंक भी हुई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह भी आंदोलनकारियों के समर्थन में उतरे।
देर शाम तक जब आंदोलनकारी मांगों पर अड़े रहे तो उनकी गिरफ्तारी की गई। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के आह्वान पर रविवार को प्रदेशभर से आंदोलनकारी मुख्यमंत्री आवास कूच के लिए पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने आंदोलनकारियों को हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया, जिससे नाराज आंदोलनकारियों की पुलिस के साथ धक्कामुक्की हो गई। आक्रोशित आंदोलनकारी यहीं धरने पर बैठ गए। यहां प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आंदोलनकारियों ने कहा कि वह अब अपने हक के लिए चुप नहीं बैठेंगे और न सरकार व नेताओं को अपनी मनमर्जी चलाने देंगे।
सूचना पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी भी पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों को मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया। हालांकि आश्वासन के बाद भी आंदोलनकारी मांगों पर अड़े रहे। आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान, वीरेंद्र पोखरियाल, जगमोहन नेगी, मनीष कुमार, नरेंद्र सेठियाल, प्रदीप कुकरेती, प्रभात ध्यानी, मोहन सिंह रावत, अवतार सिंह बिष्ट , बाल गोविंद डोभाल, डॉ विजेंद्र पोखरियाल ने एक स्वर में आंदोलनकारियों की मांगों की अनदेखी पर आक्रोश जताया।