उत्तराखंड के चमोली जिले में गोपेश्वर में चुफलागाड नदी के किनारे बसा घाट बाजार कई आपदाओं का दंश झेल चुका है। आपदा के लिहाज से घाट बाजार महफूज नहीं है। चारों ओर से पहाड़ियों से घिरे घाट बाजार के बीचोंबीच से चुफलागाड नदी बहती है। इस नदी के उफान पर आने से भी कई लोग अकाल मौत का शिकार हुए हैं। मंगलवार को यहां तीन जगहों पर बादल फटने की घटना ने क्षेत्र में हुई आपदा की घटनाओं की याद दिला दी।
घाट बाजार चुफलागाड नदी के दोनों ओर से बसा हुआ है। यहां नदी तीव्र ढलान में बहती है, जिससे अतिवृष्टि होने पर नदी रौद्र रुप में बहती है। नदी के दोनों ओर बाढ़ सुरक्षा कार्य भी नहीं हुए हैं।
पंडित शंभू प्रसाद पांडे और क्षेत्र पंचायत सदस्य दीपक रतूड़ी का कहना है कि बरसात में घाट बाजार रहने लायक नहीं है। पहाड़ियों पर कब भूस्खलन हो जाए, यह कहा नहीं जा सकता है। बरसात में हर बार घाट बाजार के दुकानदार और स्थानीय लोगों में अफरातफरी मच जाती है।
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चमोली में बादल फटा
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
राजेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि तेज बारिश होने पर कई लोग अपने घर छोड़ देते हैं। बाजार के चारों ओर सुरक्षा के इंतजाम किए जाने चाहिए।
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चमोली में बादल फटा
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
चुफलागाड और नंदाकिनी के किनारे टूटे तटबंधों के स्थान पर बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जाने चाहिए।
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चमोली में बादल फटा
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
घाट ब्लॉक में कब-कब हुई बादल फटने की घटनाएं:
वर्ष 2013- बिनसर पहाड़ी की तलहटी में अतिवृष्टि से घाट पुराना बाजार मलबे में तब्दील हुआ, 10 मकानों को नुकसान।
वर्ष 2015- बरसात में चुफलागाड नदी के रौद्र रूप में बहने पर कई लोगों ने अपने घर छोड़े। दो दिन तक घाट बाजार में अफरातफरी रही।
वर्ष 2017- नंदाकिनी नदी में बाढ़ आने से दो लोग बह गए थे, कई दुकानों को नुकसान हुआ था।
वर्ष 2019- घाट के लांखी और बांजबगड़ गांव में बादल फटने से छह लोगों की मौत, 3 लोग घायल हुए थे।