उत्तराखंड में इस मंदिर के रहस्य ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों की नींद उड़ा रखी है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित कसारदेवी मंदिर में ऐसी शक्ति है, जिसका लोहा खुद नासा भी मान चुका है।
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यह मंदिर दूसरी शताब्दी का माना जाता है। स्वामी विवेकानंद 11 मई 1897 में इस मंदिर में पहुंचे थे। माना जाता है कि यहां उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
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kasardevi temple
दरअसल, लंबे समय से पर्यावरणविद डॉक्टर अजय रावत ने इस स्थान पर शोध किया। उन्होंने बताया था कि कसारदेवी मंदिर के आसपास वाला पूरा क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है, जहां धरती के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड है। इस पिंड में विद्युतीय चार्ज कणों की परत होती है जिसे रेडिएशन भी कह सकते हैं।
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अब तक हुए इस अध्ययन में पाया गया है कि अल्मोड़ा स्थित कसारदेवी मंदिर और दक्षिण अमेरिका के पेरू स्थित माचू-पिच्चू व इंग्लैंड के स्टोन हेंग में अद्भुत समानताएं हैं।