चमोली की ऋषिगंगा में अचानक बाई बाढ़ और फिर उससे मची तबाही के वास्तविक कारणों को जानने के लिए कई एजेंसियां लगी हुई हैं। वैज्ञानिक शोध भी हो रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर कंपनियां यहां काम करती रही हैं। कंपनियां यहां भारी विस्फोट करतीं थीं और परियोजना निर्माण का मलबा भी ऋषिगंगा में ही डंप किया जाता था। इस कारण भी आपदा का रूप भयावह रहा।