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चमोली आपदा: मलबा हटाने के दौरान तपोवन सुरंग से निकलने लगा पानी, दलदल बनने की भी आशंका

Tue, 16 Feb 2021 10:14 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ(चमोली)
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चमोली में सुरंग के अंदर मलबा हटाती जेसीबी - फोटो : अमर उजाला
ऋषिगंगा में आई आपदा  के दसवें दिन मंगलवार को सुरंग से मलबा हटाने के दौरान अंदर से पानी आने लगा। इसके बाद खुदाई का काम रोक दिया गया। अब पंप मशीन लगाकर सुरंग से पानी निकाला जा रहा है। दस दिन बाद तपोवन टनल से दो और शव मिले। दोनों देहरादून के रहने वाले थे। अभी तक कुल 58 शव और 24 मानव अंग बरामद हो चुके हैं। कुल 30 शवों और एक मानव अंग की शिनाख्त हुई है। अभी भी आपदा में 146 लोग लापता हैं।
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सुरंग के अंदर रास्ता बनाते जवान - फोटो : ANI
सात फरवरी को ऋषिगंगा में आई आपदा में 206 लोग लापता हो गए थे, जिनको तलाशने का काम लगातार जारी है। मंगलवार को तपोवन जल विद्युत परियोजना की सुरंग से दो शव बरामद हुए, जिनकी शिनाख्त अनिल पुत्र थेपा सिंह निवासी कालसी देहरादून और राहुल पुत्र कृष्ण किशोर निवासी बड़कोट रानीपोखरी डोईवाला देहरादून के रूप में हुई है। वहीं सुरंग से अब तक 11 शव बरामद हो चुके हैं।
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तपोवन सुरंग के पास मशीनें - फोटो : अमर उजाला
वहीं तपोवन जल विद्युत परियोजना की सुरंग से मलबा हटाने के दौरान मंगलवार दोपहर करीब दो बजे अंदर से पानी आने लगा, जिसके बाद पाइप बिछाकर और हैवी पंप लगाकर अंदर से पानी खींचने का काम शुरू किया गया। देर शाम तक पानी निकालने का काम जारी था। ऐसे में मलबा हटाने का काम दो बजे से बंद रहा।  पानी भरने से अंदर दलदल बनने की भी आशंका जताई जा रही है।

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तपोवन सुरंग के पास मशीनें - फोटो : अमर उजाला
रैणी के पास ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट और उसके आसपास मलबे के ढेर लगे हैं। यहां से सिल्ट और मलबा हटाने के लिए एनडीआरएफ के करीब 40 जवान लगे हुए हैं। एनडीआरएफ के कमांडेंट विकास ने बताया कि मलबे से संभावित जगह पर शव तलाशने का काम जारी है।
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चमोली में आपदाग्रस्त क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की ओर से लापता लोगों के परिजनों के सैंपल लिए जा रहे हैं। अब तक 91 लोगों के डीएनए सैंपल लिए जा चुके हैं। वहीं जोशीमठ थाने में 179 लोगों की गुमशुदगी दर्ज है। जिन शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई है उनके भी डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं।
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बैराज साइट पर नदी के ऊपर बनाया गया अस्थाई पुल - फोटो : अमर उजाला
रैणी गांव में ऋषिगंगा पर बीआरओ की तरफ से बनाए गए अस्थायी पुल से सीमा पर तैनात सेना और आईटीबीपी के जवानों के लिए भी आवागमन कुछ आसान हो गया है। हालांकि वैली ब्रिज नहीं बनने से फिलहाल वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही है, लेकिन जरूरी सामान लाने और ले जाने में कुछ आसानी हो गई है। इस पुल से हर दिन 300 से 400 लोग आवाजाही कर रहे हैं।
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