कई दशक बाद यूसीसी धरातल पर उतरेगी। समान नागरिक संहिता की कानूनी जंग लड़ने वाले अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय ने कहना है कि उत्तराखंड में यह ऐतिहासिक काम होगा। यह देश के लिए नजीर बनेगा और संविधान निर्माता यही चाहते थे।
उनका कहना है कि भारतीय संस्कृति महिला-पुरुष के भेदभाव का विरोध करती है। दुर्भाग्यवश भारत में आज भी बहुत सारी कुरीतियां जारी हैं। कुछ कुप्रथाओं के खिलाफ कानून बनें, लेकिन अब भी समाज कई ऐसी कुरीतियां विद्यमान हैं, जिन्हें खत्म करने की जरूरत है। जानें कब से शुरू हुई थी यूसीसी के लिए लड़ाई