जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि किसी को भी शंकराचार्य कहना सनातन धर्म का अपमान है। उन्होंने कहा कि जो धर्माचार्य कोर्ट के फैसले का नहीं मानने की बात कहते है उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर वे फिर कोर्ट में अपील के लिए क्यों गए।
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स्वरूपानंद।
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार को जोशीमठ रवाना होने से पहले कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने तीन धर्मगुरुओं की ओर से खुद पर लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य किसी के भी बनाने से नहीं बन जाते बल्कि इसके लिए विधिवत परंपरा के अनुसार शंकराचार्य बनाया जाता है।
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शंकराचार्यों
- फोटो : amarujala
उन्होंने मीडिया को भी इस बात के लिए नसीहत दी कि किसी को भी शंकराचार्य न लिखा जाता है। शंकराचार्य ने कहा कि यह सनातन धर्म का अपमान हैं। उन्होंने दोहराया कि वे किसी से भी शास्त्रार्थ के लिए तैयार हैं। साथ ही कहा कि धर्मगुरुओं का काम धर्म की रक्षा करना है।
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shankaracharya war
कहा, जो लोग अस्पताल चलाने और अन्य सामाजिक काम करने की बात कहकर अपने को शंकराचार्य बता रहे हैं वे इतने भर से शंकराचार्य नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि इसके लिए अलग मानक है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा भी मध्य प्रदेश में आदिवासियों के बीच अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। बनारस समेत कई स्थानों पर शिक्षा के अध्ययन के साथ ही लोक कल्याण के अनेक काम किए जा रहे हैं।
स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती द्वारा कोर्ट के फैसले को नहीं मानने के बारे में दिए गए बयान पर उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय का फैसला नहीं मानना है तो वासुदेवानंद महाराज को स्पष्ट करना चाहिए कि वे फिर कोर्ट में अपील करने क्यों गए। उन्हें पता होना चाहिए कि कोर्ट का फैसला नहीं मानना अपराध होता है। बुधवार को जगद्गुरु शंकराचार्य जोशीमठ के लिए रवाना हो गए।