सुरकंडा देवी रोपवे तैयार होने में छह साल का वक्त लगा। रोपवे निर्माण कार्य में लगातार विलंब के चलते कार्य की लागत डेढ़ गुना तक बढ़ी। लोड टेस्टिंग और तमाम तकनीकी जांच के बाद रोपवे संचालन की अनुमति मिल पाई। बावजूद इसके रोपवे सेवा शुरू होने के दो माह के अंतर्गत ही संचालन में तकनीकी दिक्कतें आने पर सवाल उठ रहे हैं।
कद्दूखाल-सुरकंडा देवी रोपवे के लिए वर्ष 2014-15 में 13 करोड़ की धनराशि मंजूर हुई थी। अक्तूबर 2016 में कद्दूखाल में रोपवे का शिलान्यास किया गया, लेकिन शुरूआती दौर में ही वन अधिनियम आड़े आने से कार्य में विलंब होता गया। शिलान्यास के आठ माह बाद 19 जून से कार्यदायी संस्था सुरकंडा देवी रोपवे प्रोजेक्ट कंपनी ने निर्माण शुरू किया। 30 नवंबर 2018 में कार्यदायी संस्था ने रोपवे का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
एक से 31 दिसंबर तक प्रतिदिन रोपवे का ट्रायल के बाद एक जनवरी 2019 से रोपवे से श्रद्धालुओं को सुरकंडा मंदिर तक पहुंचाने की सेवाएं शुरू होनी थी, लेकिन तय समय पर कार्य पूरा न होने पर लोकार्पण के लिए जून 2020 की तिथि तय की गई। इस दौरान कोरोना संक्रमण काल में रोपवे का कार्य पूरी तरह से बंद रहा। 2021 में कार्य शुरू होने और निर्माण में विलंब के चलते रोपवे की लागत बढ़कर 32 करोड़ तक पहुंच गई।
इस वर्ष चैत्र नवरात्र अप्रैल से रोपवे का संचालन शुरू करने की तिथि तय की गई, लेकिन चैत्र नवरात्र से पहले रोपवे की लोड टेस्टिंग और अन्य तकनीकी जांच नहीं होने के कारण 21 अप्रैल से ट्रायल के तौर पर सेवा शुरू की गई।
एक मई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने सुरकंडा पहुंचकर विधिवत रोपवे सेवा का शुभारंभ किया था। पहले चरण में रोपवे पर 12 ट्रालियां संचालित की जा रही थी। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बाद पिछले जून से सभी 16 ट्रालियां संचालित की जा रही है। एक ट्राली में छह लोगों की बैठने की सुविधा उपलब्ध है।