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मौत से 5 दिन पहले ही बजरंगबली के इस धाम आए थे रोहित शेखर, जाहिर की थी अपनी ये इच्छा

Wed, 24 Apr 2019 04:37 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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रोहित शेखर तिवारी - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के पूर्व सीएम स्व. एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी मौत के पांच दिन पहले ही अपनी मां उज्ज्वला  तिवारी के साथ उत्तराखंड के कैंची धाम आए थे। वहीं इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू करने की इच्छा भी जाहिर की थी। 
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रोहित शेखर तिवारी - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि गत 16 अप्रैल को रोहित शेखर तिवारी का निधन हो गया था। उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा था, लेकिन इसकी सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही साफ हो पाएगी। 
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रोहित शेखर तिवारी - फोटो : अमर उजाला
लोकसभा चुनाव में मतदान के लिए रोहित शेखर अपनी मां उज्जवला के साथ 11 अप्रैल को ही हल्द्वानी आए थे। इस दौरान वे बजरंगबली का रूप माने जाने वाले नीम करौली बाबा के कैंची धाम भी दर्शन करने गए थे। 

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रोहित शेखर तिवारी - फोटो : अमर उजाला
वोट डालने के बाद उन्होंने नैनीताल सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हरीश रावत के पक्ष में ही मतदान करने की अपील की थी। साथ ही भविष्य में कांग्रेस के साथ अपना सियासी सफर भी शुरू करने की घोषणा की थी। 
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रोहित शेखर तिवारी - फोटो : अमर उजाला
अपने जैविक पुत्र को राजनीति में स्थापित करने के लिए एनडी ति वारी ने भी खूब मशक्कत की, लेकिन बात नहीं बन पाई थी। राजनीति में कॅरिअर बनाने की उनकी यह इच्छा कभी बीजेपी, कभी सपा और कभी कांग्रेस से जुड़ने के असमंजस के बीच परवान नहीं चढ़ पाई।
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रोहित शेखर तिवारी - फोटो : अमर उजाला
एनडी तिवारी के प्रति मुलायम-अखिलेश के बेहद सम्मानजनक व्यवहार का नतीजा था कि रोहित को यूपी सरकार में दायित्वधारी बनाया गया। माना ये ही गया कि सपा से अपने अच्छे रिश्तों के नतीजतन एनडी ने न सिर्फ बेटे रोहित को दायित्व दिलाया, बल्कि कांग्रेस को भी एक संदेश देने की कोशिश की कि उनकी स्वीकार्यता सपा में भी है।
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वोट डालने के लिए अपनी मां के साथ हल्द्वानी गए थे रोहित - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
वहीं साल 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले रोहित ने भाजपा की सदस्यता ले ली। 2017 के विधानसभा चुनाव में रोहित के चुनाव लड़ने की खूब चर्चाएं रहीं। उन्होंने इसके लिए प्रयास भी किए, लेकिन भाजपा से उन्हें टिकट नहीं मिल पाया। इसलिए उन्होंने थक हारकर 11 अप्रैल को कांग्रेस के साथ ही अपना राजनीतिक सफर शुरू करने की इच्छा जाहिर की थी। 
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