युवा वर्ग में शांति की संस्कृति का निर्माण करने का लक्ष्य व विश्व में लोगों में शांति जगाने निकले अंतरराष्ट्रीय शांति दूत प्रेम रावत ने मजह तीन साल की उम्र से ही प्रवचन शुरू कर दिया था।
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प्रख्यात अध्यात्मिक गुरु हंसजी महाराज इनके पिता थे। प्रेम रावत का जन्म 10 दिसंबर 1957 को हरिद्वार में हुआ था। आज के समय में दुनिया भर में इनके हजारों अनुयायी हैं।
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अपने पिता श्रीहंसजी महाराज के लिए आयोजित कार्यक्रमों में प्रेम ने तीन साल की उम्र से ही प्रवचन शुरू कर दिया था।
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4 साल की उम्र में दिया गया उनका प्रवचन पहली बार प्रकाशित हुआ था। जब ये आठ साल के थे तो इन्होंने शांति सन्देश को विश्व में जन-जन तक पहुंचाने की जिम्मेवारी संभाली।
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रावत ने देश में जगह-जगह आयोजित कार्यक्रमों में लोगों को संबोधित किया। लोग उनसे आकर्षित होने लगे और उन्हें बाल योगेश्वर के नाम से जानने लगे। 13 साल की उम्र में उन्हें लन्दन और लॉस-एंजेलेस में प्रवचन के लिए आमंत्रित किया गया, और उनकी यात्राओं का सिलसिला शुरू हो गया। उसके बाद उन्हें लगभग हर देश से प्रवचन के आमंत्रण आने लगे।
उन्होंने 'प्रेम रावत फाउंडेशन' की स्थापना की है, जो लोगों की मूल जरूरतों जैसे पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पानी, आश्रय और मुफ़्त चिकित्सा उपलब्ध कराती है। रावत ने विश्व के 90 से अधिक देशों और 300 से अधिक शहरों में लोगों को संबोधित किया है।