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भारत के इस जनजातिय गांव को मिला है नाग देवता का आशीर्वाद, होता है चमत्कार

Mon, 19 Jun 2017 08:47 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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naag panchami
सांप को देखकर हर किसी की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है, लेकिन भारत में एक ऐसा गांव हैं जहां नाग देवता का आशीर्वाद बरसता है। जानिए सांप से जुड़ा अनोखा रहस्य...
 
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nag devta temple - फोटो : amar ujala
उत्तराखंड प्रदेश के जनजातिय क्षेत्र जौनसार बावर के गांव सुरेऊ में नाग देवता की महिमा है। यहां नाग देवता के स्मरण भर से चमत्कार हो जाता हे।

 
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सांप - फोटो : Amar Ujala
यहां सांप काटने पर उपचार की जरूरत नहीं पड़ती। ग्रामीणों की मान्यता है कि नाग देवता के स्मरण करने से सांप के काटे का जहर उतर जाता है।


 

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ग्रहण में धोखा देने का फल
ग्रामीण मानते है कि नाग देवता उनके अनाज और धन की भी सुरक्षा करते है। नाग देवता रुष्ट न हो, इसके लिए गांव में हर साल तेरह अप्रैल को नाग देवता की पूजा को भव्य आयोजन किया जाता है।

 
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जहरीले सांप
कालसी प्रखंड के दुर्गम में बसे सुरेऊ गांव 46 परिवार रहते हैं। गांव के मुखिया (स्याणा) शांति सिंह चौहान बताते है कि जंगलों से घिरा होने के कारण अक्सर गांव में सांप दिखाई पड़ते हैं। कई बार सांप लोगों को काट भी चुके हैं।

 
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Kiss to Snake
उन्होंने बताया कि नाग देवता की कृपा से गांव में आज तक किसी भी व्यक्ति को सांप से काटने से मौत नहीं हुई। बताया कि सांप के काटने पर यहां उपचार की जरूरत नहीं पड़ती। नाग देवता के स्मरण मात्र से ही सांप के काटने का जहर उतर जाता है। गांव में सदियों से नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है।


 
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snake
देवता रुष्ट न हो इसके लिए हर साल 13 अप्रैल को गांव में नाग देवता की पूजा अर्चना होती है। बुरांस के फूल, आटे और गुड़ से विशेष भोजन तैयार किया जाता है। जिसका भोग देवता को लगाया जाता है। यही नहीं इस दिन गांव के प्रत्येक घर से एक व्यक्ति देवता के नाम पर उपवास भी रखता है।


 
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रिटायर फौजी इंद्र सिंह को साल में तीन से चार बार सर्पदंश की पीड़ा झेलनी पड़ती थी। यह सिलसिला 1991 से शुरू हुआ और 2010 तक चला। वर्ष 1991 में पहली बार इंद्रसिंह को ड्यूटी के दौरान सांप ने डसा। इसके बाद यूपी, पुंछ, राजौरी और किन्नौर समेत कई जगहों पर ड्यूटी के दौरान उन्हें सर्प दंश झेलना पड़ा। मगर हर बार इंद्रसिंह की जान बचती रही।
नाग देवता मंदिर समिति के अध्यक्ष शूरवीर सिंह ने बताया कि एक साल पूर्व गांव में ही देवता का मंदिर बनाया गया। इससे पूर्व तक ग्रामीण एक किमी दूर स्थित नाग देवता के मूल स्थान नगाया डांडा पर पूजा अर्चना के लिए जाते थे, देवता की अनुमति लेकर मंदिर को गांव में ही बनाया गया। 17 अप्रैल को देवता के मूल स्थान नगाया डांडा में बिस्सू का आयोजन किया जाता है। इसमें सिलगांव खत के 10 गांव के लोग शामिल होते हैं।
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