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धरने पर बैठी महिलाओं से हुआ था बलात्कार, क्या आप जानते हैं 'इतिहास' का ये शर्मनाक सच

Mon, 03 Oct 2016 10:49 AM IST
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून
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मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर एक अक्तूबर 1994 को पुलिस बर्बरता का नया इतिहास रचा गया था। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि रात के अंधेरे में जान बचाने के लिए भागी महिलाओं की अस्मत लूटी गई। सीबीआई जांच में इसकी पुष्टि हुई थी। रेप के मामले में सीबीआई बनाम मिलाप सिंह और सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी मामले में 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ  आरोप तय किए जा चुके हैं। इस विभत्स घटना के बाद ये आंदोलन देश के सबसे बर्बर आंदोलन में शुमार हो गया।
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उत्तराखंड को पृथक राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर दिल्ली में रैली करने जा रहे उत्तराखंड के नौजवानों, बुजुर्गों और महिलाओं पर यूपी पुलिस ने कहर बरपाया था। लाठीचार्ज और गोलीबारी में बेकसूर सात उत्तराखंडी मारे गए थे, जबकि काफी लोग घायल हुए थे।
 
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यह मामला गवाही पर लगा है। सत्ता में रही कांग्रेस और भाजपा बरसी पर उन्हें याद करने तक ही सीमित रही। किसी भी दल ने पीड़ितों को जल्द इंसाफ दिलाने के लिए कोई योजना नहीं बनाई। मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर पुलिस गोलियों से छलनी हुए बेकसूरों उत्तराखंडियों को अब तक इंसाफ नहीं मिला है। 22 साल बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय का इंतजार है। 
 

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प्रदेश की कांग्रेस और भाजपा सरकार ने दोषियों को सजा दिलाने के दावे तो किए, लेकिन किया कुछ नहीं। आरोपी पुलिस कर्मियों की मौत के साथ दो मुकदमों की फाइल बंद हो चुकी है, जबकि अन्य पांच मुकदमों की पैरोकारी में बरती जा रही हीलाहवाली पीड़ितों को तड़पा रही हैं।
 
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मुकदमा नंबर एक : मुजफ्फरनगर की कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मोती सिंह ने ही उत्तराखंडियों के खिलाफ  मामला दर्ज कराया था। सीबीआई जांच के बाद मोती सिंह को फर्जी लिखा पढ़ी का आरोपी बनाया था। सिंह की मौत होने के कारण इस मुकदमे की फाइल बंद हो गई।
 
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मुकदमा नंबर दो : सीबीआई जांच में आया था कि छपार के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजबीर ने तत्कालीन एसपी राजेंद्र पाल सिंह के निर्देश पर जीडी में फर्जी लिखा पढ़ी कर हेराफेरी की थी। एसपी तो साक्ष्यों के अभाव में बरी हो गए, जबकि थानाध्यक्ष के खिलाफ आरोप तय हुए थे, लेकिन इसी बीच राजबीर सिंह की मौत के कारण यह मामला बंद हो गया। 
 
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खतौली के तत्कालीन इंस्पेक्टर एसपी मिश्रा पर आरोप था कि देहरादून के मनियावाला निवासी राजेश नेगी की पुलिस गोली से मौत होने के बाद उसके शव को साथी पुलिसकर्मियों की मदद से जौली गंगनहर में फेंक दिया था। इस मामले में आरोपी तय हो चुके हैं। 
 
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सीबीआई बनाम ब्रजकिशोर सिंह। कांधला के तत्कालीन थानाध्यक्ष बृजकिशोर सिंह पर आरोप है कि उत्तराखंड आंदोलनकारियों पर पुलिस फायरिंग के बाद उन्होंने उत्तराखंडियों की तलाशी में फर्जी हथियार बरामदगी दिखाई और मुकदमा दर्ज किया। आरोप तय होने के बाद मामले में सुनवाई चल रही है। एक अन्य मामला सीबीआई बनाम दाताराम आजाद भी लंबित चल रहा है।
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