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ब्रह्मकुंभ वह स्थल है, जहां इलावृत्त के राजा श्वेत ने दस हजार वर्षों तक ब्रह्मा के लिए तपस्या की थी। प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने दर्शन दिए और राज की इच्छा अनुसार अपने नाम से ब्रह्मकुंड की स्थापना की। श्वेत की प्रार्थना पर ब्रह्मा के साथ शिव और विष्णु भी यहां आकर विराजे। सृष्टि नियंता ब्रह्मा ने वरदान दिया कि देश के सभी तीर्थ इस ब्रह्मकुंड में निवास करेंगे।