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कांवड़ यात्रा में भूलकर भी न तोड़ें ये नियम, शिवजी हो जाएंगे नाराज!

Fri, 14 Jul 2017 05:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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kanwar yatra
सावन के मह‌ीने में माना जाता है क‌ि भगवान शिव का जलाभिषेक करने से शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूरा करते हैं। लेक‌िन कांवड़ ले जाते समय कुछ न‌ियम भी जरूरी होते हैं। अगर इन्हें तोड़ा तो श‌िवजी नाराज भी हो सकते हैं।
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श‌िवभक्त गंगाजल लाने और उससे शिवलिंग का अभिषेक करवाने तक का यह पूरा सफर पैदल और नंगे पांव करते हैं। 
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कावड़ यात्रा शुरू करते ही कावड़ियों के लिए किसी भी प्रकार का नशा करना वर्जित होता है। यात्रा पूरी होने तक उस व्यक्ति को मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करना होता है।

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kanwar - फोटो : अमर उजाला
बिना स्नान किए कावड़ को हाथ नहीं लगा सकते, इसलिए स्नान करने के बाद ही कावड़िए अपने कावड़ को छू सकते हैं।
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टपकेश्वर मंद‌िर के महंत कृष्‍णा ग‌िरी महाराज के अनुसार चमड़े की किसी वस्तु का स्पर्श, वाहन का प्रयोग, चारपाई का उपयोग, ये सब कावड़ियों के लिए वर्जित कार्य है। इसके अलावा किसी वृक्ष या पौधे के नीचे भी कावड़ को रखना वर्जित है।
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कांवड़ यात्रा - फोटो : amar ujala
कावड़ ले जाने के पूरे रास्ते भर बोल बम और जय शिव-शंकर का उच्चारण करना फलदायी होता है। कावड़ को अपने सिर के ऊपर से लेकर जाना भी वर्जित माना गया है।
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इन सभी नियमों का पालन करना जरूरी है और इसके लिए कावड़ियों की संकल्पशक्ति की मजबूती होनी चाह‌िए। कहा जाता है क‌ि जो श‌िवभक्‍त ऐसा नहीं करते हैं उनकी मनोकामना पूरी नहीं होती है। 
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