पेशवाई
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तब बैरागी, संन्यासी, उदासी, निर्मल, घीसापंथी, गरीबदासी, कबीरदासी, रामानंदी आदि साधुओं की जमातों में रजवाड़ों की सेनाएं अपने रथों, हाथियों, घोड़ों और हथियारों के साथ चला करती थी। ऐसे में साधुओं के अखाड़ों के साथ राजाओं और जागीरदारों को भी कुंभ स्नान का प्रतिफल प्राप्त हो जाता। इसी प्रकार देशभर में भ्रमणशील जमातें कुंभ से पूर्व रमतापंचों के साथ कुंभनगर पहुंचती।