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सामूहिक आत्महत्या : हमारी लाश घरवालों को मत देना, कर्मचारियों को दे देना

Fri, 16 Sep 2016 11:23 PM IST
टीम डिजिटल

सार

- अब्दुल्लापुर निवासी सीमेंट व्यापारी दो भाइयों की कार गंगनहर के पास मिली
- सुसाइड नोट में दोनों भाई, छोटे भाई की पत्नी और बेटे समेत नहर में कूदने की लिखी बात
- पीएसी और एनडीआरएफ के गोताखोरों को नहीं मिला चारों का कोई सुराग
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gangnahar - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुसाइड नोट छोड़कर दो व्यापारी परिवार लापता  
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अब्दुलापुर निवासी सीमेंट व्यापारी दो भाइयों के बृहस्पतिवार सुबह लापता होने की खबर से हड़कंप मच गया। इनकी मारुति कार जानी थाना क्षेत्र स्थित गंगनहर के पास लावारिस हालत में खड़ी मिली। जबकि अब्दुलापुर स्थित गोदाम में एक पेज का सुसाइड नोट मिला। जिसमें सूदखोरों से तंग आकर दोनों भाइयों, छोटे भाई की पत्नी और उसके बेटे के साथ गंगनहर में कूदकर जान देना बताया गया। पीएसी और एनडीआरएफ के गोताखोरों ने दिन भर नहर में खोजबीन की। लेकिन चारों लोगों का कोई सुराग नहीं लगा।
पुलिस के अनुसार भावनपुर थाना क्षेत्र के अब्दुलापुर निवासी जितेंद्र मित्तल (50) पुत्र बांकेलाल व उनके भाई रविन्द्र मित्तल (45) सीमेंट कारोबारी है। जेल चुंगी और अब्दुलापुर में उनका ऑफिस और गोदाम है। बृहस्पतिवार सुबह करीब नौ बजे जब दोनों भाई अपने ऑफिस नहीं पहुंचे तो कर्मचारी इनके सबसे बड़े भाई चतरसेन मित्तल के घर पहुंचे। चतरसेन जब छोटे भाई जितेंद्र के ऑफिस पहुंचे तो वहां मेज पर एसएसपी के नाम एक सुसाइड नोट रखा मिला। जिसमें सूदखोरों से तंग आकर जितेंद्र और रविन्द्र के साथ रविंद्र की पत्नी क्षमा मित्तल (42) व पुत्र ऋषभ मित्तल (21) द्वारा जानी गंगनहर में कूदकर जान देने की बात कही गई। एसपी देहात ने बताया कि पीएसी और एनडीआरएफ के गोताखोरों ने शाम तक गंगनहर में खोजबीन की। लेकिन चारों लोगों का कोई सुराग नहीं मिला। सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। 
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सुसाइड नोट में व्यापारी ने बयां की प्रताड़ना की कहानी
असल से ज्यादा ब्याज चुकाया... पर अब नहीं! हम चार लोग गंगनहर में कूदकर आत्महत्या कर रहे हैं। हमारी लाश हमारे घरवालों को नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सुपुर्द करना। हमारी बहन, बहनोई और भांजे ने हमसे मोटा सूद (ब्याज) वसूला। अब हमें बेइज्जत कर जबरन हमारा मकान लिखवाने का दबाव बनवा रहे हैं। 10 लोग और भी हमारे पीछे पड़े हैं, जिनका हम नाम तो नहीं बताना चाहते, चूंकि पैसा लेना हम अपनी गलती मानकर चल रहे थे। हालांकि, इन लोगों को हम असल रकम से ज्यादा सूद दे चुके हैं। अगर ये अपने आप पुलिस और समाज की गिरफ्त में आ जाएं तो ठीक। इन पर भी मुकदमा दर्ज किया जा सकता है, ताकि मेरे जैसे अन्य परिवार इनके कारण मौत को गले लगाने को मजबूर न हों। यह दर्द भरे शब्द अब्दुल्लापुर निवासी दो व्यापारी भाइयों के हैं, जो सुसाइड नोट लिखकर परिवार समेत लापता हो गए हैं। एसएसपी के नाम लिखा यह सुसाइड नोट उनकी कार और गोदाम से मिला है। इस पर जितेंद्र मित्तल, छोटे भाई रविंद्र मित्तल, रविंद्र की पत्नी क्षमा मित्तल और बेटे रिषभ मित्तल के नाम व हस्ताक्षर हैं।

 

परिवार वालों को कछ न देना 

jitendre - फोटो : अमर उजाला
सुसाइड नोट में लिखा है कि जानी में अजब सिंह सीमेंट वालों के यहां हमारी मारुति कार खड़ी है, जो दोस्त राशिद मलिक के नाम है। कार उसे दे देना। पुलिस प्रशासन से अनुरोध है कि हमारी चल-अचल संपत्ति और कारोबार में से हमारे परिवार वालों को कुछ भी नहीं देना। दबाव के चलते हम मौत को गले लगा रहे हैं।
देनदारी से ज्यादा है हमारी लेनदारी 
व्यापारी भाइयों ने सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि मार्केट में देनदारी से ज्यादा हमारी लेनदारी है। देनदारी-लेनदारी की लिस्ट को लेकर हमारे कर्मचारियों को काम करने में सहयोग करना। बीस से अधिक कर्मचारी हमारे दोनों भाइयों के कारोबार से जुड़े हैं, उनकी भी रोजी-रोटी चलती रहे। सूदखोर हमारे मरने के बाद कर्मचारियों को परेशान न करने पाएं।
सुसाइड नोट में जितेंद्र और रविंद्र ने अपनी ईमानदारी, चरित्र और व्यापारिक साख का भी जिक्र किया है। अपनी बेबसी बयां करते हुए लिखा है कि तीनों दोषियों के अत्याचारों कहानी उन चार लोगों (राकेश त्यागी, राजीव शर्मा, आशुतोष गुप्ता और बड़ा भांजा) से पूछना। आगे लिखा है कि हमारी ईमानदारी, चरित्र और व्यापारिक साख पर अगर समाज का एक भी आदमी गलत रिपोर्ट दे तो भगवान हमें कभी माफ न करे और हमारी आत्मा को शांति न मिले। सुसाइड नोट में व्यापारी परिवार की दर्द भरी दास्तां और उनके दावों के पीछे की असलियत जो भी हो, लेकिन कुछ तो ऐसा हुआ होगा, जिससे उन्होंने इतना बड़ा कदम उठा लिया। हालांकि, मामले की जांच-पड़ताल में जुटी पुलिस को दोनों के घरों की तलाश के दौरान एक मोबाइल फोन मिला है। इसकी कॉल डिटेल और लोकेशन के आधार पर पुलिस पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।
एसएसपी जे. रविंदर गौड़ ने बताया क‌ि सुसाइड नोट के आधार पर गंगनगहर में पीएसी के गोताखोर और एनडीआरएफ की टीम से सर्च ऑपरेशन चलवाया गया है। पुलिस की अलग-अलग टीमें कई बिंदुओं पर जांच कर रही हैं। जब तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती, साफतौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
 

कारोबार तो करोड़ रुपये का  

ravindre - फोटो : अमर उजाला
लोगों में चर्चा रही कि दोनों भाई जितेंद्र और रविंद्र मिलकर रहते थे। आखिर ऐसी क्या मजबूरी रही कि जिनका करोड़ रुपये का कारोबार हो और बीस से ज्यादा नौकर हों, उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठा लिया। वहीं, पुलिस अफसरों का कहना है कि सुसाइड नोट मिलने से ही सब कुछ नहीं माना जा सकता। पूरे खुलासे के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। 
अब्दुलापुर में जितेंद्र और रविंद्र मित्तल घर ठीक हालत में है। जितेंद्र की पत्नी की पूर्व में मौत हो चुकी है। जिसका बेटा हल्द्वानी में रहता है। इस घर में दोनों भाइयों के अलावा रविंद्र की पत्नी और बेटा रहते हैं। दोनों भाइयों के मकान से करीब 50 मीटर की दूरी पर बड़े भाई और भाजपा नेता चतरसेन का आलीशान मकान है। जिनका रूकनपुर में ईट भट्ठा भी है। पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। मां सबसे बड़े बेटे के पास रहती है।  

चतरसेन मित्तल से सवाल-जवाब

chama - फोटो : अमर उजाला
- क्या आपके छोटे भाइयों ने कर्ज के बारे में कुछ बताया?
जवाब : नहीं, सुसाइड नोट देखकर पूरा परिवार सदमे में है।
- छोटे भाइयों से कभी विवाद हुआ?
जवाब: नहीं। घर पर आना-जाना था। परिवार के लोगों में आपस में बातचीत भी होती रहती थी।
- दोनों को कभी परेशानी में देखा?
जवाब : ऐसा कुछ मुझे लगा नहीं। हो सकता हो कि उन्होंने बताने की कोशिश न की हो।
- कर्ज के बारे में आपसे शिकायत की हो?
जवाब : कर्ज के बारे में किसी ने मुझे नहीं बताया। जो पैसा जिससे लिया होगा, उसी को जानकारी होगी।
- कोई पारिवारिक संपत्ति का विवाद रहा हो?
जवाब : इसे पारिवारिक संपत्ति का विवाद भी नहीं कहा जा सकता। दोनों भाई भी व्यापारी हैं। मेरा अपना अलग काम है। पूरी घटना से मैं आहत हूं, जिस पर कुछ नहीं कह सकता। 
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1.30 करोड़ का मामला 

gangnahar - फोटो : अमर उजाला
यह भी चर्चा है कि इस तरह लापता होने के पीछे जेल चुंगी पर 1.30 करोड़ कीमत की जमीन का मामला है। सुसाइड नोट में भाइयों ने खुदकुशी करने के पीछे एक रिश्तेदार का नाम लिखा है। उक्त रिश्तेदार ने पुलिस अफसरों को फोन कर कहा कि दो दिन पहले अब्दुल्लापुर में पंचायत हुई थी। जिसमें तय हुआ था कि व्यापारी पैसा दे देगा या बैनामा करेगा। कहा कि रिश्तेदार है, सूदखोर नहीं। व्यापारी फैमिली ने सिर्फ डराने के लिए ड्रामा किया है। वहीं, जितेंद्र के गोदाम के नौकर विक्रम ने बताया कि जितेंद्र बाबूजी बुधवार रात से ही तनाव में थे। 
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