छत्तीसगढ़ की एक और पंडवानी गायिका ऊषा बारले को पद्मश्री सम्मान मिलेगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार की ओर से इसकी घोषणा की गई है। दुर्ग की रहने वाली ऊषा बारले को बचपन में उनके पिता ने गायन के चलते ही कुएं में फेंक दिया था, लेकिन इसी के दम पर वह सम्मान के शिखर पर पहुंची। खास बात यह है कि ऊषा बारले ने तीजनबाई से ही पंडवानी सीखी है। इससे पहले तीजनबाई को पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सम्मान दिया जा चुका है।