कैंसर के लिए महंगी दवाओं से बेहतर इस गाय का दूध है, दावा है कि इस गाय के दूध से कैंसर तक को खत्म किया जा रहा है।
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गाय का दूध पीने से कैंसर तक की बिमारी खत्म होने का दावा किया गया है, यह खुलासा हरियाणा के करनाल में मौजूद नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सिज (NBAGR) में हुए अभी तक के शोध में हुआ है।
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शोध में पता चला है कि वैचूर नस्ल की गाय के दूध में ए-2 बीटाकेसीन तो है ही, साथ ही इसके दूध में कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी है। वैदिक मान्यता के मुताबिक, भारतीय गोवंश समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ, इसी वजह से जंगली प्रवृत्ति से दूर रहा। दूध की गुणवत्ता के वैज्ञानिक आंकलन में भी भारतीय गोवंश की प्रामाणिकता सिद्ध हुई है।
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संस्थान की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मोनिका सोढी की मानें तो इस गाय के लैक्टोकेरिन में आरजीनो की मात्रा अधिक होती है। यही कारण है कि इसके दूध में कैंसर प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा है। इस शोध में उनके साथ डॉ. मनीषी मुकेश व उनकी स्टूडेंट अंकिता शर्मा भी काम कर रही हैं। अभी तक लगभग 50 गायों पर रिसर्च की जा चुकी है।
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वैसे तो वैचूर नस्ल की यह अनोखी गाय केरल में पाई जाती है, लेकिन कारसगुड़ इसका गढ़ बताया जाता है। दूध उत्पादन की बात करें तो स्थानीय लोग आठ किलो तक का दावा करते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गाय छह किलो तक दूध देती है। खास बात यह भी है कि इसके रख-रखाव का खर्च भी बेहद कम है। इसको विशेष डाइट देने की जरूरत नहीं होती। बाहर से ही घास-फूस खाकर अपना पेट भर लेती है।
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गाय की वैचूर प्रजाति दुनिया की सबसे छोटी नस्ल है। सांड की ऊंचाई महज तीन फुट होती है, जिनकी संख्या कम हो चुकी है। इस प्रजाति की गाय में सर्वाधिक 7 फीसदी वसा पाई जाती है, किंतु संख्या बढ़ाने पर सरकारों ने कोई रुचि नहीं ली।
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भारतीय पशुओं की नस्लीय विशेषता हमेशा सम्मान का पात्र रही है। गोवंश के मूत्र में रेडियोधर्मिता सोखने की क्षमता पायी जाती है, जो भोपाल गैस त्रासदी के दौरान भी सिद्ध हो चुकी है। गोबर से लीपे हुए घरों पर कम असर हुआ। अमेरिका ने भी गोमूत्र में कैंसर विरोधी तत्व होने को लेकर पेटेंट दिया है। गाय के दूध में स्वर्ण भस्म भी बनता है। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने भी गाय के दूध को सर्वोत्तम माना है। गाय का घी खाने से कोलेस्ट्रोल नहीं बढ़ता।
- डा. डीके सधाना, पशु वैज्ञानिक, एनडीआरआई, करनाल
वैचूर नस्ल की गाय के दूध में कैंसर प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा है। हालांकि इस पर अभी रिसर्च चल रही है कि दूध में और क्या गुणवत्ता है। जानने की कोशिश की जा रही है कि यह गाय कितना तापमान झेलने में सक्षम है। हमने सैंपल लेते समय इस बार का ध्यान रखा है कि सभी गाय एक परिवार से ना हों। अलग-अलग गांवों से सैंपल एकत्रित किए गए हैं।
डॉ. मोनिका सोढ़ी, प्रधान वैज्ञानिक, एनबीएजीआर