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Tokyo Olympic 2021: पिता ने कहा था- गांव की बेटियों को विदेश कौन ले जाएगा, अब टोक्यो ओलंपिक में खेलेगी बेटी

Fri, 23 Jul 2021 06:22 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)
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हॉकी खिलाड़ी सविता पुनिया। - फोटो : @savitahockey
हॉकी खेल से जो सम्मान मिला है उसे मैं लब्जों में बयान नहीं कर सकती। मैंने मेहनत की और आज मैं भारतीय टीम के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रही हूं। मेरे पिता हर समय मुझे हौसला देते थे ताकि मैं अपने खेल पर फोकस कर सकूं। यह कहना है हरियाणा के सिरसा जिले के जोधका गांव की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया का। उन्होंने बताया कि छठी कक्षा में हॉकी स्टिक को पकड़ा था। उस समय हॉकी स्टिक उनके कंधे तक आती थी। सन् 2004 में उन्होंने सिरसा के महाराजा अग्रसेन स्कूल में कोचिंग शुरू की। स्कूल में खेल गतिविधियों में सविता पूनिया की फुर्ती देखकर अध्यापक दीपचंद ने उनके पिता महेंद्र पूनिया से हॉकी नर्सरी में नाम दर्ज करवाने की बात कही थी। उस समय अभिभावकों का बेटियों को खेलकूद के क्षेत्र में भेजने का रुझान नहीं था लेकिन पिता ने हॉकी की कोचिंग दिलवाने पर सहमति जताई।
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भारतीय महिला हॉकी टीम। - फोटो : @TheHockeyIndia
पिता से बात करते समय अध्यापक दीपचंद ने मजाक में कहा था कि अच्छा खेलेगी तो एक दिन विदेश जाएगी। जिस पर पिता ने कहा कि गांव की बेटियों को विदेश कौन लेकर जाएगा।
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हॉकी खिलाड़ी सविता पुनिया। - फोटो : @savitahockey
कोचिंग के दौरान खेल छोड़ने का भी बनाया था मन  
नर्सरी हॉकी में दाखिले के बाद शुरूआती दो साल कोचिंग के बहुत कठिन थे, इस दौरान कई बार खेल छोड़ने का मन किया। पिता ने भी कहा अगर सहीं नहीं लग रहा तो छोड़ दे। रात भर सोचने के बाद सुबह खुद ब खुद दिमाग हॉकी स्टिक को खोजने लगता।

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हॉकी खिलाड़ी सविता पुनिया। - फोटो : @savitahockey
सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी टीम में गोल कीपर के तौर पर खेलती हैं। सन् 2008 में जर्मनी में हॉकी टूर्नामेंट के बाद हॉकी स्टिक को सविता ने कभी अपने से दूर नहीं होने दिया। सबसे पहले 2016 में ओलंपिक खेला और अब 2021 में टोक्यो ओलंपिक खेल रही हूं।
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भारतीय महिला हॉकी टीम। - फोटो : @KirenRijiju
वर्ष 2018 में सविता पूनिया अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित हो चुकी हैं। सविता के पिता महेंद्र पूनिया स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि जब बेटी खेल को छोड़ने का मन बनाती थी तो वह उसकी बात पर हमेशा सहमति देते थे।
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