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गुमनामी और गरीबी में विदा हो गया देश का सितारा, कभी राजीव गांधी थे मुरीद, सिद्धू ने की थी मदद

Wed, 08 Jan 2020 12:46 AM IST
ajay kumar गोविंद परवाना, मनीमाजरा
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- फोटो : अमर उजाला
सारंगी वादक ईदू शरीफ के चाहने वालों की लंबी फेहरिस्त थी लेकिन जब वे आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे, तब उनकी मदद के लिए कोई नहीं आया। एक बार नवजोत सिंह सिद्धू जरूर आए थे और दो लाख रुपये दे गए थे। ईदू शरीफ के चाहने वालों में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी थे। जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तो उन्हें उनके सम्मान में सारंगी बजाने का निमंत्रण भेजा गया। 
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ईदू शरीफ - फोटो : फाइल फोटो
एक महीने तक वे वहां पर रहे। खूब आदर सत्कार हुआ लेकिन अंतिम समय में उनके साथ कोई खड़ा नहीं हुआ। उनके परिवार ने तत्कालीन पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल से उनके चंडीगढ़ स्थित निवास में मिलकर अपील की थी कि उनकी वित्तीय हालात को सुधारा जाए। लेकिन उस दिन के बाद से आज तक वह ईदू की हालात पूछने भी नहीं आए।
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ईदू शरीफ - फोटो : फाइल फोटो
ईदू शरीफ के बेटे विक्की का कहना है कि बादल सरकार हो या कैप्टन, कई बार सरकारी दफ्तरों और कोठियों के चक्कर काटे लेकिन मदद के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। उनके पिता पंजाब की शान थे। बड़े-बड़े मंत्री अपने कार्यक्रमों में उन्हें बुलाते थे। मेहमानों के सामने वे गाते थे। जब तक उनकी सारंगी चलती रही, हर कोई उनका कद्रदान बना रहा। सरकार चाहती तो उनके जरिए इस कला का जादू पूरे विश्व में बिखेर सकती थी। विक्की भी सारंगी बजाते हैं लेकिन उनके पास कोई रोजगार नहीं है। वे चाहते हैं कि पंजाब सरकार उनकी मदद करे।

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ईदू शरीफ से नवजोत सिंह सिद्धू ने की थी मुलाकात। - फोटो : फाइल फोटो
कवि व लेखक डा. सुरजीत पातर ने बताया कि वे ईदू को साल 1986 से जानते थे। जब उनके पास कुछ नहीं था तो रोजी-रोटी के लिए वे रेहड़ा चलाते थे। किसी ने उन्हें बजाते देखा तो उनकी खोज हुई। उसके बाद उन्होंने अपने आपको निखारा और धीरे-धीरे उनकी आवाज और सारंगी का हर कोई दीवाना हो गया। पातर बताते हैं कि जब भी उनकी मुलाकात होती थी तो वे कुछ मांगने के बजाए गीत मांगते थे। वे कहते थे कि गाने के लिए कोई गीत दे दो।
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- फोटो : फाइल फोटो
अमर उजाला के संग साझा किए थे संघर्ष के दिन
साल 2014 में ईदू ने अमर उजाला के साथ दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि वह कई साल से सरकार से दरख्वास्त कर रहे हैं कि उनके पास जीविका चलाने के लिए आय का कोई साधन नहीं है। इस वजह से सरकार की ओर से उन्हें पेंशन दी जाए। उनके साथी कलाकार आज अच्छे से रह रहे हैं लेकिन उन्हें अभी तक रहने के लिए एक अच्छी जगह नसीब नहीं हुई। उनके बेटे के पास भी कोई नौकरी नहीं है। उनकी पत्नी कुछ काम करती हैं। उसी से दो जून की रोटी नसीब हो पाती है।
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- फोटो : फाइल फोटो
जब पैरालिसिस का अटैक पड़ा तो उन्हें कोई गाड़ी में ले जाने वाला भी नहीं मिला। मुश्किल से एक ऑटो में ईदू को मोहाली के एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल किया गया। उस दौरान उनकी पत्नी ने बताया कि पैरालिसिस के कारण हर हफ्ते उनका 12 हजार रुपये तक का खर्च आ जाता है। डॉक्टर ने कहा है कि इनका इलाज करवाया जाए और उसके लिए 5 लाख रुपये लगेंगे। उषा ने बताया था कि उन्होंने डॉक्टर से गुहार लगाई की यह नेशनल अवार्ड विनर आर्टिस्ट हैं तो डॉक्टर ने कहा कि कला को अपने पास रखो ऑपरेशन कराना है तो पैसे लगेंगे। उन्होंने बताया कि तबसे ईदू का ऑपरेशन नहीं हो पाया।
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