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'ऑपरेशन मेघदूत' के जांबाज को आखिरी सलाम, पढ़ें- कैसे पीएन हूण ने कब्जाया था सियाचिन

Tue, 07 Jan 2020 05:56 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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Prem Nath Hoon - फोटो : फाइल फोटो
भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम नाथ हूण का सोमवार शाम ब्रेन हैमरेज से निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार चंडीगढ़ में होगा। आज देश उन्हें नमन कर रहा है। उनकी रणनीति और वीरता का गवाह खुद सियाचिन है। आइए जानते हैं लेफ्टिनेंट जनरल प्रेमनाथ हूण के नेतृत्व में चलाए गए ऑपरेशन की कहानी...
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Prem Nath Hoon
पाकिस्तान की नजर 33 हजार वर्गकिलोमीटर में फैले सियाचीन पर थी। भारत सरकार की आंख तब खुली जब पाकिस्तान ने सियाचिन पर कब्जे की तैयारी शुरू की। पाकिस्तान ने यूरोप में बर्फीले क्षेत्र में पहने जाने वाले खास तरह के कपड़ों और हथियारों का बड़ा ऑर्डर दिया था। सेना इस सूचना से चौकन्ना हो गई और सियाचिन की तरफ कूच कर दिया। फिर शुरू हुआ दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में ऑपरेशन मेघदूत।
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Prem Nath Hoon - फोटो : अमर उजाला
पीएन हूण का जन्म पाकिस्तान के एबटाबाद में हुआ था। लेकिन बटंवारे के समय उनका परिवार भारत आ गया। पीएन हूण 1987 में पश्चिमी कमान प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। साल 2013 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उस समय चर्चा थी कि वे लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।  हूण की पहचान तेज तर्रार कमांडर के रूप में थी। ‘ऑपरेशन मेघदूत’ की अगुवाई जनरल हूण ने ही की थी।

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Prem Nath Hoon - फोटो : अमर उजाला
उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने सियाचिन की हड्डियां गला देने वाली ठंड में पाक सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। यह ऑपरेशन अप्रैल, 1984 में लांच किया गया था। उस वक्त भारत को अपनी खुफिया एजेंसी रॉ से खबर मिली कि 17 अप्रैल, 1984 को पाकिस्तान सेना सियाचिन ग्लेशियर कब्जाने के लिए चढ़ाई करेगी। अगर पाकिस्तान इस चोटी को अपने कब्जा कर लेता तो भारतीय सेना के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती थीं।
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Prem Nath Hoon - फोटो : अमर उजाला
उनकी सूझबूझ और दूरदर्शिता के चलते भारतीय सैनिकों ने समय रहते वहां पर कब्जा जमाकर भारतीय झंडा फहरा दिया और माइनस 50-60 डिग्री तापमान में सैनिक डटे रहे। यह दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चलाया गया भारतीय सेना का साहसी ऑपरेशन था। इस ऑपरेशन की खास बात यह थी कि भारतीय सैनिकों के पास समय बहुत कम था, ज्यादा सैनिक भी नहीं थे। उपकरणों की बेहद कमी थी। भारतीय सेना के आगे पाकिस्तान को अपने मंसूबों से पीछे हटना पड़ा और इसी का नतीजा है कि आज भी इस चोटी पर भारत का कब्जा है। पीएन हूण ने 40 वर्षों तक देश की सेवा की।
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Prem Nath Hoon
हूण देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी बेहद सजग थे। एक बार अमर उजाला को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि आतंकवाद अब एक बड़ी समस्या बन चुका है। भारत में रहते हुए भी जो लोग पाकिस्तान का झंडा और आईएसआईएस का झंडा लहरा रहे हैं उन्हें देश से निकाल देना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की वकालत हमेशा की। उन्होंने पीएम मोदी को कार्य करने की क्षमता और विजन रहने वाला बेहतर नेता बताया था।
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