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सुर्खियों में एक जेल: पहली बार एक साथ आए फांसी के 7 कैदी

Wed, 23 Dec 2015 10:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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रोहतक जिला जेल में ये पहला मौका है कि यहां पर गैंगरेप के मामले में लाए गए विचाराधीन कैदियों में सात को फांसी की सजा दी गई। वह भी एक साथ। देखिए, तस्वीरें।
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सोमवार देर शाम सातों कैदियों को जेल लाया गया। वहीं 68 वर्षों में 191 फांसी की सजा पाए कैदियों को लाया गया। अब इन सात कैदियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद ये संख्या बढ़कर 198 हो गई। जबकि 31 अपराधियों को इसी जेल में फांसी दी गई। ये फांसी पुरानी जेल में दी गई थी।

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इन सात के अलावा फांसी की सजा वाले दो और कैदी बंद हैं। इनमें कबूलपुर गांव की सोनम और उसका प्रेमी शामिल है। दोनों को मार्च 2014 में फांसी की सजा सुनाई गई थी। हवस में अंधे दोनों दोषियों ने सोनम के पूरे परिवार की हत्या कर उनके शवों पर संबंध बनाए थे।

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जेल अधीक्षक दयानंद मंडोला ने बताया कि जिला जेल में अंतिम बार 25 मई 1979 को फांसी दी गई थी। यह फांसी हत्या के जुर्म में सोनीपत के गांव मंडोरा निवासी रामफल पुत्र छोटेराम को दी गई थी। इसके  बाद से आज तक जिला जेल में कोई फांसी नहीं दी गई है।

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कब-कब सुनाई गई फांसी की सजाः अंबाला कैंट की जिला अदालत ने वर्ष 2010 में नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के दोषी एक युवक को फांसी और एक युवक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में हाई कोर्ट ने फांसी की सजा पाए युवक की सजा को उम्रकैद में परिवर्तित कर दिया था।
हिसार: रेप के बाद कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या के मामले में 2007 में दोषी राजेश को एडीजे ने फांसी की सजा सुनाई।

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सिरसा में साढ़े चार वर्षीय मासूम का अपहरण करके गैंगरेप के बाद उसकी हत्या करने के आरोपियों को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिरसा आरपी गोयल की अदालत ने 18 नवंबर 2013 को फांसी की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने आरोपी विकास उर्फ विक्की, पवन उर्फ चीला निवासीगण डबवाली को बच्ची के अपहरण, उससे कुकर्म और उसकी हत्या का दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई।

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रोहतक कोर्ट में सामूहिक दुष्कर्म और मर्डर के सातों आरोपियों के चेहरे पहले सामान्य थे। फैसला आते ही दोषियों के चेहरे सफेद पड़ गए, परिजन रो पड़े। देखिए, तस्वीरें।

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जैसे ही दोषियों को कोर्ट परिसर में पुलिस वैन से लाया गया। तब अंदर दो दोषी शून्य को ताक रहे थे, जबकि तीन की निगाहें नीचे थीं। दो के चेहरों पर कोई भाव नहीं था। बहस के बाद फैसला लंच के बाद तक के लिए टाला गया। सातों दोषियों को वापस बैरक में लाया जा रहा था।

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तब सुनील माढा के चेहरे पर हल्की मुस्कान तैर कर गायब हो गई। सामने उसका भाई खड़ा उसे हसरत से देख रहा था। लंच के बाद जब फैसला सुनने के लिए दोषियों को बैरक से कोर्ट रूम में पुलिस ले जा रही थी, सभी की आंखों में खौफ था। एक दोषी के पैर कांप रहे थे, लेकिन पुलिसकर्मी उसे खींचकर ले गए।

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एक दोषी के कदम डगमगाए और वह गिरने को ही हुआ था कि पुलिसकर्मी ने उसे सहारा दिया। जब फैसला सुनने के बाद दोषियों को बाहर लाया गया। सभी के चेहरे ठोस हो चुके थे, चेहरे के भाव मर चुके थे। हालांकि परिजन अपने आंसू नहीं रोक पाए। पवन का भाई विकास बेतहाशा रोए जा रहा था। वह किसी से बात भी नहीं कर रहा था।

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जब उससे उसका नाम पूछा उसने विकास बताया और मुंह फेर लिया। उससे फिर पूछा किसके परिजन हो, दायां हाथ उठाकर बोला पवन का भाई हूं। फैसले के बारे में जब पूछा तो आंखों में आंसू भर कर दूसरी ओर चल दिया। सुनील उर्फ माढा के भाई सुरेश सहित कुछ दोषियों के परिजनों ने फैसलों को एकतरफा बता दिया।

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सुरेश ने कहा कि न तो मेरे भाई का डीएनए मैच हुआ था और न ही उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत या गवाह ही था। फिर भी उसे मौत की सजा सुनाई गई। सुरेश का कहना था कि फैसला एकतरफा है। हमारे पक्ष को नजरअंदाज किया गया। हम हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। कुछ दोषियों के परिजनों ने मीडिया से पूरे समय दूरी बनाए रखी।

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रोहतक गैंगरेप के आठों आरोपियों ने पहली बार कबूला कि वारदात को उन्होंने कैसे अंजाम दिया? पुलिस पहली बार उन्हें बिना नकाब के सामने लेकर आई।

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आरोपियों ने नेपाली मूल की मंदबुद्धि युवती के साथ हैवानियत हाईवे किनारे बने दो मंजिला कमरे में ही शुरू कर दी थी। आरोपियों ने सीन ऑफ क्राइम पर पहुंच कर खुलासा करते हुए सबसे पहले रोड से करीब 150 मीटर भीतर दो मंजिला कमरे की निशानदेही कराई। यहां आरोपियों ने लड़की के साथ पहली बार बरामदे में ही दुराचार किया।

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लड़की के ज्यादा शोर मचाने पर आरोपियों ने खूब मारपीट भी की। बरामदे में रेप करते समय फंसने के डर से उन्होंने उसे वहां से उठा लिया और 500 मीटर और भीतर की ओर एकांत में बने कमरे में ले गए। बचने और भागने का प्रयास कर रही लड़की को कामांध युवकों ने बालों से पकड़कर घसीटा।

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आरोपियों ने उस कमरे में भी पहुंचकर निशानदेही कराई। यहां युवती के साथ अप्राकृतिक यौनाचार भी किया गया। सूत्रों की मानें तो सभी नौ आरोपियों ने उसके साथ दो या दो से अधिक बार दुराचार किया। मन भर गया तो अधमरी हालत में लड़की को वहां से बाइक पर उठाकर नहर के किनारे ले जाया गया और निर्मम हत्या कर दी।

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हत्या करने से पहले दरिंदों ने युवती के शरीर में पत्थर भी डाल दिए। बुरी तरह से तड़पती युवती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सोमवार को गिरफ्तारी के बाद बृहस्पतिवार को सभी आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाया गया और निशानदेही करवाई गई। 6 घंटे चली कार्रवाई में आरोपी एक के बाद एक घटनास्थल पर पुलिस टीम को लेकर पहुंचे।

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रोहतक मंडल की फोरेंसिक टीम ने कई साक्ष्य जुटाए। सूत्रों की मानें तो पुलिस को मौके से आरोपियों के खिलाफ र्प्याप्त सबूत मिल गए हैं। बृहस्पतिवार सुबह साढ़े 11 बजे एसआईटी आठों आरोपियों पवन, मनबीर, पदम उर्फ प्रमोद, संतोष नेपाली, सरवर उर्फ बिल्लू, सुनील उर्फ शीलू, सुनील उर्फ मड्ढा, राजेश उर्फ घूचडू को हाईवे किनारे बने पहले कमरे में लेकर पहुंची।

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सभी आरोपियों से पुलिस ने घटनाक्रम से संबंधित जानकारियों के आधार पर निशानदेही कराई। मामले में 9वें आरोपी सोमबीर ने पकड़े जाने के डर से आत्महत्या कर ली थी। टीम के साथ फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. राजपाल व डॉ. सरोज दहिया के साथ-साथ पब्लिक मैन भी शामिल रहे। पूरी जांच एसआईटी प्रभारी डीएसपी अमित भाटिया के नेतृत्व में सीआईए-1 प्रभारी मनोज वर्मा, सदर थाना एसएचओ गजेंद्र सिंह, थाना पीजीआई प्रभारी एमआई खान कर रहे हैं।

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रोहतक कोर्ट ने साढ़े 10 माह में ही केस में सुनवाई पूरी कर दी। 15 अक्तूबर से गवाही का दौर शुरू हुआ था। अक्तूबर माह में गवाही के लिए 9 दिन निर्धारित किए गए थे। इस दौरान कुल 57 लोगों की गवाही हुई। आरोपी पक्ष की ओर से भी तीन गवाह पेश किए गए था। दोषियों को बिना नकाब के देखिए तस्वीरों में।

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गौरतलब है कि रोहतक से 01 फरवरी 2015 को लापता नेपाली युवती का नग्न अवस्था में शव चार फरवरी को बहुअकबरपुर गांव के खेतों में मिला था। पोस्टमार्टम के दौरान खुलासा हुआ कि युवती से सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया गया था। बाद में पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था जबकि एक आरोपी ने दिल्ली में आत्महत्या कर ली थी।

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पूछताछ में सामने आया था कि गैंग रेप, कुकर्म और बेरहमी से हत्या के बाद भी दरिंदगी के आरोपियों का मन नहीं भरा। निर्भया की सांस बंद होने तक उसके पास रहे आरोपी राजेश उर्फ घुचडू ने युवती के कानों से बाली और नाक की नथनी तक उतार ली।

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रोहतक कोर्ट में 9 सितंबर 2015 को सभी आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किए गए थे। 15 अक्तूबर से गवाही का दौर शुरू हुआ था। अक्तूबर माह में गवाही के लिए 9 दिन निर्धारित किए गए थे। इस दौरान कुल 57 लोगों की गवाही हुई जबकि आरोपी पक्ष की ओर से भी तीन गवाह पेश किए गए। न्यायाधीश सीमा सिंघल की कोर्ट ने सभी सातों आरोपियों को दोषी करार दे दिया। अब 21 दिसंबर को सजा पर बहस होगी। इसके बाद कोर्ट फैसला सुनाएगी।
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आरोपियों ने उसके साथ गद्दी खेड़ी गांव के खेतों में बने दो अलग-अलग कमरों में गैंगरेप किया। एक कमरे में कई घंटे नोचने के बाद एक बार तो आरोपियों ने उसे हाथ पकड़कर शहर की तरफ रवाना कर दिया था।

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