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देखिए, सजा-ए-मौत मिलते ही कैसे थे दोषियों-परिजनों के चेहरे?

Wed, 23 Dec 2015 10:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक।
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रोहतक कोर्ट में सामूहिक दुष्कर्म और मर्डर के सातों आरोपियों के चेहरे पहले सामान्य थे। फैसला आते ही दोषियों के चेहरे सफेद पड़ गए, परिजन रो पड़े। देखिए, तस्वीरें।
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जैसे ही दोषियों को कोर्ट परिसर में पुलिस वैन से लाया गया। तब अंदर दो दोषी शून्य को ताक रहे थे, जबकि तीन की निगाहें नीचे थीं। दो के चेहरों पर कोई भाव नहीं था। बहस के बाद फैसला लंच के बाद तक के लिए टाला गया। सातों दोषियों को वापस बैरक में लाया जा रहा था।
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तब सुनील माढा के चेहरे पर हल्की मुस्कान तैर कर गायब हो गई। सामने उसका भाई खड़ा उसे हसरत से देख रहा था। लंच के बाद जब फैसला सुनने के लिए दोषियों को बैरक से कोर्ट रूम में पुलिस ले जा रही थी, सभी की आंखों में खौफ था। एक दोषी के पैर कांप रहे थे, लेकिन पुलिसकर्मी उसे खींचकर ले गए।

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एक दोषी के कदम डगमगाए और वह गिरने को ही हुआ था कि पुलिसकर्मी ने उसे सहारा दिया। जब फैसला सुनने के बाद दोषियों को बाहर लाया गया। सभी के चेहरे ठोस हो चुके थे, चेहरे के भाव मर चुके थे। हालांकि परिजन अपने आंसू नहीं रोक पाए। पवन का भाई विकास बेतहाशा रोए जा रहा था। वह किसी से बात भी नहीं कर रहा था।
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जब उससे उसका नाम पूछा उसने विकास बताया और मुंह फेर लिया। उससे फिर पूछा किसके परिजन हो, दायां हाथ उठाकर बोला पवन का भाई हूं। फैसले के बारे में जब पूछा तो आंखों में आंसू भर कर दूसरी ओर चल दिया। सुनील उर्फ माढा के भाई सुरेश सहित कुछ दोषियों के परिजनों ने फैसलों को एकतरफा बता दिया।
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सुरेश ने कहा कि न तो मेरे भाई का डीएनए मैच हुआ था और न ही उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत या गवाह ही था। फिर भी उसे मौत की सजा सुनाई गई। सुरेश का कहना था कि फैसला एकतरफा है। हमारे पक्ष को नजरअंदाज किया गया। हम हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। कुछ दोषियों के परिजनों ने मीडिया से पूरे समय दूरी बनाए रखी।
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देशभर को दहलाने वाले दिल्ली निर्भया रेप केस और रोहतक रेप केस में कई समानताएं और कुछ अंतर सामने आए हैं। देखिए, दोनों मामलों पर एक नजर।

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दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को निर्भया से गैंगरेप हुआ। 29 दिसंबर 2012 को निर्भया की सिंगापुर में मौत हो गई। 3 जनवरी 2013 को कोर्ट में चालान पेश किया गया और 7 जनवरी को कोर्ट में ट्रायल शुरू हो गया।

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रोहतक रेप केस में एक फरवरी में युवती घर से गायब हुई। चार फरवरी को नग्न अवस्था में उसका शव मिला। 21 जुलाई 2015 को पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की। 3 सितंबर पुलिस ने दो महीने बाद कोर्ट में सप्लीमेंटरी चालान पेश किया। 15 अक्तूबर पहली गवाही हुई। लगातार 9 दिनों तक गवाहियों का दौर चला। 30 नवंबर 2015 को गवाही पूरी। 1 से 7 दिसंबर तक आरोपियों के 313 के बयान दर्ज किए गए। आज सातों को फांसी।

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समानताएं: चाहे दिल्ली रेप केस हो या रोहतक रेप केस। दोनों मामलों में मुख्य समानता यही थी कि वारदातों को बेहद घिनौने तरीके से अंजाम दिया गया था। रेप के बाद आरोपी इतनी बेदर्दी से पीड़िताओं के साथ पेश आए, ये सोचकर भी दिल दहल जाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से दोनों की ये पुष्टि हुई।

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दिल्ली रेप केस में एक नाबालिग समेत 6 लोगों पर युवती से रेप और हत्या के आरोप लगे। रोहतक में एक नाबालिग समेत 9 लोगों पर रेप और हत्या के आरोप लगे। दोनों मामलों में एक आरोपी नाबालिग है। दिल्ली केस का नाबालिग बरी हो चुका है।

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2 फरवरी 2013: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दिल्ली रेप केस में पांच लोगों पर हत्या, गैंगरेप और मामलों में आरोप तय किए। इनमें से 11 मार्च 2013 को आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। रोहतक केस के एक आरोपी ने भी जहर निगलकर जान दी।

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दिल्ली रेप केस के चारों आरोपियों (नाबालिग को छोड़कर) को फांसी की सजा सुनाई गई थी। नाबालिग आरोपी को 31 अगस्त 2013 को तीन साल की सजा मिली थी। रोहतक रेप केस के सभी आरोपियों (नाबालिग को छोड़कर) को फांसी की सजा सुनाई गई है। नाबालिग का केस कोर्ट में है।

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मुख्य अंतर: दिल्ली रेप केस में फास्ट ट्रेक कोर्ट में आरोपियों को करीब 6 महीने बाद दोषी करार देकर सजा सुनाई थी, जबकि इसके मुकाबले में रोहतक रेप केस में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल की अदालत ने 3 महीने से भी कम समय से आरोपियों को दोषी करार दे दिया। पीड़ित पक्ष के वकील प्रदीप मलिक ने बताया कि यह फैसला अपने आप में नजीर है। आजतक किसी मामले में इतनी जल्द सजा नहीं सुनाई गई।

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दिल्ली रेप केस के आरोप में 7 लोगों को नामजद किया गया था, जबकि रोहतक रेप केस में इससे भी ज्यादा आरोपी शामिल थे। मामले में 9 लोगों को आरोपी बनाया गया। दिल्ली रेपकेस सामने आने के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए, जबकि रोहतक रेप सामने आने के बाद हरियाणाभर में प्रदर्शन हुए।

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रोहतक रेपकांड की शिकार निर्भया को कोर्ट से इंसाफ मिल गया। रोहतक कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म व हत्या के सभी 7 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। देखिए, पूरा मामला।
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गौरतलब है कि रोहतक रेपकांड के सातों आरोपियों को रोहतक कोर्ट ने 18 दिसंबर को दोषी करार दिया गया था। पीड़ित पक्ष के वकील ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानकर फांसी की मांग की थी, जबकि दोषियों के वकील का पक्ष था कि इन्हें अलग अलग धाराओं में सजा दी जाए। गौरतलब है कि सभी सातों दोषी एक ही गांव गद्दी खेड़ी के रहने वाले हैं।
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