प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीआईपी कल्चर बैन तो कर दिया, लेकिन इसके कारण अफसरों के लिए एक मुसीबत खड़ी हो गई है। देखिए आखिर किस तरह की।
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देश में लालबत्ती कल्चर खत्म करने के बाद हरियाणा में अफसरों-विधायकों की बेचैनी बढ़ने लगी है। लालबत्ती की चमक और हूटर की धमक के साये में चलने वाले सूबे के बड़े नेता व अफसर इस बात से परेशान हैं कि वे आम लोगों को अपने वीआईपी कल्चर का अहसास कैसे करवाएं? अब नेता और अधिकारी जहां अपने ‘रुतबे’ को बरकरार रखने में जुट गए हैं, वहीं इस बाबत विधानसभा स्पीकर कंवर पाल ने एक बैठक भी ली।
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- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान बैठक में विधायकों और अफसरों ने पेश आने वाली कुछ परेशानियों से उन्हें अवगत कराया। सूत्रों के अनुसार, अफसरों और विधायकों ने स्पीकर को बताया कि लालबत्ती का कल्चर खत्म होने के बाद फिल्ड में उन्हें कई तरह की समस्याएं पेश आ रही हैं। सबसे बड़ी दिक्कत टोल पर पेश आती है। वहां टोल अथॉरिटी के कारिंदे उनकी कारों को रोकने लगे हैं।
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जब उन्हें अफसर व विधायक अपना स्टेट्स बताते हैं, तो भी कई बार गाड़ी पर लालबत्ती न होने की बात कहकर कारिंदों से उनके वाहन चालकों की बहस हो जाती है। कई विधायक और अफसर तो ऐसे विवादों से बचने के लिए कार की छत से उतारी लालबत्ती को कार के भीतर डैश बोर्ड पर रखकर चल रहे हैं, ताकि अपनी टोर को कार के बाहर नहीं तो भीतर से दिखा सकें।
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उधर, अफसरों, विधायकों ने बताया कि वे पीएम के वीआईपी कल्चर खत्म करने की पहल की सराहना करते हैं, लेकिन कुछ व्यवस्था ऐसी जरूर होनी चाहिए, जिससे आमजन को मालूम चल सके कि संबंधित वाहन में कोई अफसर या विधायक मौजूद है। विधानसभा स्पीकर ने लालबत्ती वाली वीआईपी पहचान खत्म होने के बाद से परेशान विधायकों और अफसरों का दर्द सुना और फिर बैठक में इसका विकल्प ढूंढने पर चर्चा भी की गई।
इस दौरान विधायकों और अफसरों को लालबत्ती के बजाय वीआईपी स्टीकर जारी करने पर विचार किया गया। हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि माननीयों कोवीआईपी स्टीकर जारी करने का प्रस्ताव जल्द सिरे चढ़ सकता है।