हम आपको रिश्तों के कत्ल की वो खौफनाक कहानी याद करा रहे है, जिसमें एक बेटी ने अपने ही मां-बाप, भाई और बच्चों समेत 8 लोगों की हत्या कर दी गई थी। मृतक विधायक रेलूराम पूनिया के भाई ने फैमिली को इंसाफ दिलाने के लिए राम सिंह ने लंबी लड़ाई लड़ी, जिनकी मई 2017 में हिसार-टोहाना रोड पर सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
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रेलू राम पूनिया और परिवार हत्याकांड
यह हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। क्योंकि परिवार का हत्यारा, मृतक का दामाद संजीव फरार हो गया है। वह पैरोल पर आया था, लेकिन 14 दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद भी वह जेल नहीं लौटा। अब पता चला है कि उसने पुलिस को चकमा दिया है। वह हरियाणा में यमुनानगर के चंगनौली स्थित अपने घर गया ही नहीं।
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रेलू राम पूनिया और परिवार हत्याकांड
जानकारी के मुताबिक, संजीव मूल रूप से सहारनपुर का रहने वाला है। उसने संजीव कुमार ने पैरोल एप्लीकेशन में बिलासपुर के गांव चंगनौली का एड्रेस दिया, जबकि वह यहां आया ही नहीं। संजीव ने फरीदाबाद जेल से पैरोल की अर्जी लगाई थी। इसी बीच 18 फरवरी को संजीव उसकी पत्नी सोनिया को कुरुक्षेत्र जेल ट्रांसफर कर दिया गया। मई में संजीव को 14 दिन की पैरोल मिली।
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रेलू राम पूनिया और परिवार हत्याकांड
कुरुक्षेत्र जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट सुभाषचंद्र के मुताबिक, पैरोल अर्जी में परिजनों से मिलना वजह बताया था। लेकिन चंगनौली में जिस मकान का एड्रेस दिया गया, उसके मालिक बलदेव सिंह बताते हैं कि संजीव की मां कभी कभी यहां पर आती थी। उन्होंने आज तक उन्हें किराया भी नहीं दिया। उनका कहना है कि पिछले चार-पांच माह से संजीव की मां गांव में नहीं आई। अब कमरे पर ताला पड़ा है।
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रेलू राम पूनिया और परिवार हत्याकांड
गौरतलब है कि 23 अगस्त 2001 को अंबाला के प्रभुवाला गांव में पूर्व विधायक रेलूराम और उनके परिवार के 8 लोगों की हत्या कर दी गई थी। मृतकों में रेलूराम पूनिया के अलावा उनकी पत्नी कृष्णा, बेटे सुनील, बहू शकुंतला, बेटी प्रियंका, 4 साल के पोते लोकेश, ढाई साल की पोती शिवानी और डेढ़ महीने की प्रीति शामिल थे। 31 मई 2004 को सेशन जज की अदालत ने मृतक की बेटी सोनिया और दामाद संजीव को फांसी की सजा सुनाई थी।
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हाईकोर्ट
2 अप्रैल 2005 को हाईकोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदला। 15 फरवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने सेशन जज की सजा बरकरार रखने का फैसला दिया। 23 अगस्त 2007 को समीक्षा याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज हुई। सेशन जज ने 26 नवंबर 2007 को फांसी देने की तारीख मुकर्रर की। सोनिया और संजीव ने राष्ट्रपति के पास दया के लिए याचिका लगाई। 3 अप्रैल 2013 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दया याचिका खारिज कर दी थी। जनवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी थी।
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murder
हत्याकांड रात 11 बजे से सुबह 4 बजे के बीच पूरे हत्याकांड को अंजाम दिया था। सबसे पहले सोनिया और संजीव ने सोनिया के जन्मदिन की पार्टी के बहाने पटाखे के शोर में पिस्तौल से सबकी हत्या करने की योजना बनाई। पार्टी के बाद जब पटाखे चलाए गए तो कृष्णा ने रेलूराम की नींद में खलल पड़ने की बात कहकर पटाखे चलाने से मना कर दिया। तब संजीव और सोनिया ने लोहे की रॉड से हत्या करने की योजना बनाई।
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murder
योजना के तहत, दोनों ने सबसे पहले मकान की दूसरी मंजिल पर सो रहे रेलूराम की रॉड से हत्या कर दी। फिर दोनों मकान की आखिरी मंजिल पर पहुंचे, जहां उन्होंने रेलूराम की पत्नी कृष्णा और तीन माह की पोती प्रीति की हत्या कर दी। तीन हत्याएं कर सोनिया और संजीव नीचे आए तो वहां सोनिया का भाई सुनील, भाभी शकुंतला, बहन पम्मा एक कमरे में बच्चे लोकेश व शिवानी के साथ बैठे बातें कर रहे थे।
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murder
- फोटो : डेमो
दोनों पम्मा का ताइक्वांडो चैंपियनशिप में चयन करवाने का बहाना बनाकर दूसरे कमरे में ले गए और वहां उसकी हत्या कर दी। हत्या के समय कुछ शोर हुआ तो उन्होंने अटैची गिरने की बात कहकर मामले को दबा दिया। बाद में दोनों सुनील को प्रॉपर्टी का फैसला करने के लिए मां कृष्णा देवी (जिसकी पहले ही हत्या कर दी थी) के पास ले जाने लगे। शकुंतला ने भी साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उसे झगड़े की जड़ बताते हुए उन्होंने उसे साथ ले जाने से मना कर दिया।
इसी दौरान सुनील ने संजीव के कपड़ों पर खून के निशान देख लिए तो उन्होंने कृष्णा की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद सोनिया और संजीव प्रॉपटी का फैसला करने की बात कहकर सुनील को दूसरे कमरे में ले गए। शकुंतला वहां न पहुंचे, इसके लिए दोनों ने सुनील की मदद से ही उसे चारपाई से बांध दिया। फिर दोनों ने सुनील को दूसरे कमरे में ले जाकर उसकी हत्या कर दी। उसके बाद उन्होंने शकुंतला, उसके पुत्र लोकेश व पुत्री शिवानी की भी हत्या कर दी।