पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए सेवा पदक विजेता 51 साल के फतेह सिंह की अर्थी को 25 साल की बेटी मधु ने कंधा दिया। देखिए, उनकी अंतिम यात्रा।
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दो आतंकियों को मार हुए थे शहीद, अर्थी को बेटी ने दिया कंधा
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गौरतलब है कि एयरबेस में घुसे आतंकवादियों की शनिवार सुबह सबसे पहले 3 बजकर 5 मिनिट पर शहीद कैप्टन फतेह सिंह (51) से मुठभेड़ हुई थी। इंटरनेशनल शूटर कैप्टन फतेह सिंह ने हवलदार कुलवंत सिंह के साथ 20 मिनट तक अपनी राइफल से ही आतंकवादियों को रोके रखा।
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दो आतंकियों को मार हुए थे शहीद, अर्थी को बेटी ने दिया कंधा
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आतंकवादी उनपर एके-47 से गोलियां बरसा रहे थे। इतना ही नहीं, उन्होंने दो आतंकवादियों को मार गिराया और लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। शहीद कैप्टन फतेह सिंह का बेटा गुरदीप सिंह दीपू भी सेना में तैनात है।
दो आतंकियों को मार हुए थे शहीद, अर्थी को बेटी ने दिया कंधा
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छोटा बेटा नितिन ठाकुर अपनी मां मधु बाला और पारिवारिक सदस्यों के साथ पार्थिव शरीर लेने गुरदासपुर पहुंचे। परंपरा से हटकर मधु ने अपने पिता के शव को कंधा भी दिया। राजकीय सम्मान के साथ शहीद फतेह को अंतिम विदाई दी गई।
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दो आतंकियों को मार हुए थे शहीद, अर्थी को बेटी ने दिया कंधा
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गुरदासपुर के गांव गांव झंडा गुज्जरा के शहीद कैप्टन फतेह सिंह ठाकुर सेना की 16 डोगरा रेजीमेंट से बतौर कैप्टन रिटायर होकर अपने परिवार के पास मध्य प्रदेश में रह रहे थे। कुछ वर्ष पहले वह फिर सेना में बतौर अफसर डीएससी कोर में शामिल हो गए।
दो आतंकियों को मार हुए थे शहीद, अर्थी को बेटी ने दिया कंधा
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उनके भाई तरसेम सिंह ने बताया कि फतेह सिंह बचपन से ही होनहार थे। उनके चचेरे भाई खजूर सिंह ने बताया कि फतेह सिंह सेना में अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज थे। वह एशिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों में निशानेबाजी में पदक जीत चुके थे। शुक्रवार रात वह ड्यूटी पर शहीद हो गए।