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आतंकी हमले में देश ने खोया हीरो, देखिए इनके बारे में सबकुछ

Wed, 06 Jan 2016 12:54 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पठानकोट हमले में देश ने उस हीरो को खो दिया है, जिसे नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) को नहीं बल्कि पूरी आर्म्ड फोर्स को नाज था। देखिए, इनका प्रोफाइल।
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लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार एनएसजी बम निष्किय दस्ते के सबसे होनहार अधिकारियों में से एक थे। हाल ही में वे एफबीआई से ट्रेनिंग लेकर लौटे थे। उन्होंने साल 2004 में भारतीय फौज को ज्वाइन किया था।
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जब लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन झारखंड में पोस्टेड थे, तो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बमों व विस्फोटक को निष्किय करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी पहचान एक एक्सपर्ट के तौर पर होने लगी थी।

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बंगलूरू में जन्मे निरंजन का पालन-पोषण केरला में हुआ था। बचपन में ही उनकी माता का देहांत हो गया था। उनके एक भाई सारथ इंडियन एयरफोर्स में तैनात हैं। एनएसजी जाने से पहले वे मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप आफ दी आर्मी में तैनात थे।
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32 वर्षीय निरंजन तीन महीने पहले ही लेफ्टिनेंट कर्नल के तौर प्रमोट हुए थे। अपना सपना पूरा करने के लिए उन्होंने बहुत संघर्ष किया। वे अपनी पत्नी डॉ. केजी राधिका और दो साल की बेटी विष्मय को छोड़ गए हैं।
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निरंजन के पिता शिवरंजन ईके बोले, मैंने निरंजन को कॉल की तो उसने कहा वह बाद में कॉल करेगा। उसका कॉल नहीं आया पर रविवार सुबह एयरफोर्स में कार्यरत मेरे दूसरे बेटे ने फोन किया। कहा, एक बुरी खबर है। अब निरंजन की कमी उनकी कहानियां भी पूरी नहीं कर पाएंगी। 
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निरंजन ई कुमार की जिंदगी की कहानी सुनाते हुए उनकी बड़ी बहन कहती हैं कि उन्हें अर्जुन के रूप में देखती हैं, जिसने अपने कर्म को सर्वोपरि माना। बकौल बड़ी बहन, 'निरंजन चार साल का था, तब हमने मां खो दी थी। उसका बचपन दिक्कत में गुजरा।
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पठानकोट हमले में घायल एनएसजी कमांडो भूप सिंह को चंडीगढ़ लाया जा रहा है। उनकी हालत काफी गंभीर है। बम निष्क्रिय के दौरान निरंजन के साथ ही भूप सिंह भी घायल हो गए थे। उन्हें चंडीमंदिर स्थित कमांड हास्पिटल में एडमिट कराया जाएगा।
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