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Pics: शहीद गुरसेवक की शहादत को आखिरी सलाम

Wed, 06 Jan 2016 12:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला(हरियाणा)
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पठानकोट में एयरफोर्स बेस में हुए आतंकी हमले में शहीद कमांडो गुरसेवक के शव का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। तस्वीरें। साभारः एएनआई
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Pics: शहीद गुरसेवक की शहादत को आखिरी सलाम

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आज पूरे सम्मान के साथ विशेष वाहन में रखकर शहीद गुरसेवक की शव यात्रा के रूप में उसके गांव ले जाया गया। एयरफोर्स के जवानों ने सलामी दी और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतेष्टि हुई।
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शहीद की शव यात्रा में सैंकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे, वहीं एयरफोर्स और सेना के जवानों ने सलामी दी। होनहार बेटे को अंतिम विदाई के मौके पर पिता सुच्चा सिंह भावुक हो गए। हालांकि अंतिम संस्कार से पूर्व शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी पहुंचने वाले थे, लेकिन किसी कारणवश वह नहीं आ सके।

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शहीद गुरसेवक की शव यात्रा में सैंकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे, वहीं एयरफोर्स और सेना के जवानों ने सलामी दी। पूरे राजकीय सम्मान के साथ शहीद गुरसेवक की अंतेष्टि हुई। कैबिनेट मंत्री अनिल विज, नायब सिंह सैनी, कैप्टन अभिमन्यु के अलावा कई कांग्रेसी और इनेलो नेताओं ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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इससे पहले रात को एयरफोर्स अथारिटी और प्रशासन ने शहीद के शव को अंधेरे में गांव में ले जाने की अनुमति नहीं दी थी। अफसरों के फैसले के बाद शहीद के शव को एयरफोर्स स्टेशन से सीधे एक वाहन में मिलट्री अस्पताल रखवा दिया गया था। परिजनों को भी उनके साथ मिलट्री अस्पताल में भेज दिया गया। इस दौरान परिवार के लिए बेटे के शव के इंतजार में रात गुजारना भी मुश्किल बना रहा।
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शहादत की सूचना मिलने के 13 घंटे बाद गुरसेवक का शव अंबाला पहुंचा था। लेकिन उसके बावजूद भी रात को शव शहीद के घर नहीं पहुंच पाया था। पहले दिनभर और फिर पूरी रातभर अपने शहीद बेटे और पति का मुंह देखने को तरसी गुरसेवक की मां और पत्नी की आंखें पथरा गई। उनके समेत अन्य परिजनों और पूरे गांव को अपने शूरवीर पूत का इंतजार था।
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गौर हो कि बीते दिन गुरसेवक के शव को पहले पठानकोट से जालंधर आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन में लाया गया और उसके बाद एयरफोर्स का हैलीकाप्टर शव को लेकर अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा। अंबाला पहुंचते ही एयरफोर्स स्टेशन में भी मातम का माहौल बना रहा। हैलीकाप्टर के अंबाला लैंडिंग के बाद एयरफोर्स प्रोटोकॉल के तहत एयरफोर्स अंबाला के एओसी तेजिंद्र सिंह ने शहीद गुरसेवक के शव को रिसीव किया।

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शहीद के शव को अदब से एयरफोर्स स्टेशन के परिसर में रखवाया गया। उसके बाद सबसे पहले एयरफोर्स अधिकारियों व अन्य जवानों ने अपने जाबांज कमांडों को पुष्पांजलि अर्पित कर आखिरी सलामी दी। अंत में अपनी तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद एयरफोर्स और प्रशासनिक अधिकारियों व मंत्री और विधायक ने शव वारिसों के हवाले कर दिया।

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उसके बाद वहां मौजूद मंत्री अनिल विज, सिटी विधायक असीम गोयल, डीसी अंबाला अशोक सांगवान, एसडीएम कैप्टन शक्ति सिंह, तहसीलदार अनिल कौशिक समेत गुरसेवक के परिवार के बारह लोग शामिल थे। परिवार वाले चुपचाप सदमे में खड़े तिरंगे से लिपटे ताबूत को निहारते रहे। शव के साथ अबाला पहुंचा गुरसेवक का भाई भी  पूरी तरह सदमे में रहा और उसने किसी से कोई बात नहीं की।

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पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए अंबाला के गरनाला गांव के लाल गुरसेवक सिंह के शव को देखकर विलाप करती उनकी मां और पत्नी।

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पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए अंबाला के गरनाला गांव के लाल गुरसेवक सिंह के शव को देखकर विलाप करती उनकी मां और पत्नी।

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पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए अंबाला के गरनाला गांव के लाल गुरसेवक सिंह का शव लेकर पहुंचे सेना के जवान।

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पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए अंबाला के गरनाला गांव के लाल गुरसेवक सिंह का शव लेकर पहुंचे सेना के जवान।

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पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए एयरफोर्स गरुड़ कमांडो गुरसेवक की मां नहीं जानती थी कि दोपहर जिस बेटे का कुशलक्षेम पूछा है, शाम को शहादत की खबर आ जाएगी। देखिए, पूरा मामला। रिपोर्ट: मोहित धुपड़, अंबाला सिटी

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एयरफोर्स कमांडो गुरसेवक ने घर पर फोन कर परिजनों का हालचाल पूछा और अपनी भी कुशलक्षेम उन्हे दी। पिता, पत्नी से बातचीत के बाद गुरसेवक ने मां से कहा- ‘मां इस हफ्ते मेरा इंतजार न करियो, शायद में आ नहीं पाऊंगा...। लेकिन गुरसेवक की मां अमरीको को क्या मालूम था कि नियति को कुछ और ही मंजूर है।

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गुरसेवक (28) के फौजी भाई हरदीप सिंह ने जब भाई के शहीद होने की सूचना घर पर दी, तो पूरा परिवार मर्माहत हो गया। एक अलग कमरे में अपने हाथों की मेहंदी और कलाइयों में पहनी सुहाग की चूडिय़ों को देखकर गुरसेवक पत्नी जसप्रीत कौर रोती-बिलखती रही। पड़ौसी औरतें उसे ढांढस बांधती रही, लेकिन बार-बार वे भी यही दोहराती रही कि ‘जल्दी लौटने का वायदा कर गया था गुरसेवक...अब कहां है, कोई तो बताए...।

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गुरसेवक के पिता भी फौज और बड़ा भाई हरदीप भी फौज में थे। इसलिए गुरसेवक ने भी फौज में ही रहकर देश की सेवा करने की ठान ली थी। पिता ने सुच्चा सिंह ने बताया कि पांच साल और सात महीने पहले एयरफोर्स में ज्वाइनिंग पाई। बेटा बहुत दलेर था और किसी से डरता नहीं था। उसे बचपन से ही खतरनाक काम करने का शौकिन था। एयरफोर्स की गरुड़ कमांडो विंग का हिस्सा रहे गुरसेवक की जाबांजी को उनके अफसर भी बहुत सराहते थे।

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अपनी ड्यूटी में उसकी परफॉर्मेंस हमेशा आउट स्टैंडिंग रही। यही वजह रही थक जिस पद पर एयरफोर्स में अमूमन 6 साल बाद तरक्की मिलती थी, उस पद पर गुरसेवक महज साढ़े चार साल में ही पहुंच गया था। गुरसेवक को एक जांबाज और तेज तर्रार कमांडों समझा जाता था, इसलिए उसकी यूनिट ने पठानकोट में आतंकियों से लोहा लेने के लिए जिस कमांडों को टीम को तैयार किया था, उसमें गुरसेवक को भी शामिल किया गया था।
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उधर, कम समय में कोरपल पद की तरक्की पाने के बाद गुरसेवक अब एयरफोर्स में अफसर पद तक पहुंचने का टारगेट भी सैट कर चुका था और इसके लिए उसने हायर स्टडी करने की योजना भी बना ली थी। अपनी जाबांजी के बूते पर ही गुरसेवक इससे पहले झारखंड व छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाकों में भी स्पेशल ड्यूटी कर चुका था।
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