फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'पद्मावत' पर बवाल, असली जड़ चित्तौड़गढ़, जानिए क्या है असली कहानी?

Wed, 31 Jan 2018 10:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 11
padmaavat - फोटो : अमर उजाला
संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर देश भर में विवाद हो रहा है, जबकि बवाल की असली जड़ चित्तौड़गढ़ है। जानिए क्या है असली इतिहास?
विज्ञापन

2 of 11
padmaavat
190 करोड़ की लागत से भंसाली ने दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर अभिनीत मूवी 'पद्मावती' बनाई। मूवी एक दिसंबर को रिलीज की जानी थी, लेकिन करणी सेना विरोध में आ गई। करणी सेना का कहना है कि फिल्म में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती के बीच रोमांस को दिखाया गया है, जो इतिहास के साथ छेड़छाड़ है। इस बात को लेकर विवाद बढ़ता चला गया।
विज्ञापन

3 of 11
padmaavat
नतीजा, रिलीज होने से पहले ही कई राज्यों में पद्मावती पर बैन लग गया। इसलिए भंसाली ने फिल्म की रिलीज को टाल दिया है। भंसाली ने दर्शकों से अपील की है कि वे पहले फिल्म देख लें, उसके बाद ही निर्णय लें कि उसमें कुछ गलत है या नहीं। लेकिन बात नहीं बनी, परिणामस्वरूप मूवी का नाम बदला गया। कुछ और महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए, घूमर गाने में भी बड़ा चेंज किया गया।

4 of 11
padmaavat
तमाम तरह के विवादों के बाद मूवी को पद्मावत नाम से 25 जनवरी को रिलीज किया गया। हालांकि करणी सेना का विरोध जारी है, लोग भी लगातार विरोध कर रहे हैं। मूवी की रिलीज को लेकर तोड़फोड़ और आगजनी भी हुई। बावजूद इसके मूवी को देश भर में रिलीज किया गया। संजय लीला भंसाली ने खिलजी और पद्मावती को केंद्र में रखकर मूवी बनाई। हम बता रहे हैं आपको कि असली कहानी और चित्तौड़गढ़ का इतिहासा क्या है...

 
विज्ञापन

5 of 11
padmaavat
रानी पद्मावती को पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता था। वे चित्तौड़गढ़ की रानी और राजा रतनसिंह की पत्नी थीं। इन्हें बेहद खूबसूरत माना जाता था। कहा जाता है कि खिलजी वंश का शासक अलाउद्दीन खिलजी पद्मावती को पाना चाहता था। रानी को जब ये पता चला तो उन्होंने कई दूसरी राजपूत महिलाओं के साथ जौहर कर लिया। उनके अनुसार दुश्मनों के हाथ लगने से बेहतर जौहर करना ही था।
विज्ञापन

6 of 11
padmaavat
जौहर एक ऐसी प्रक्रिया है, जिनमें शाही महिलाएं अपने दुश्मन के साथ रहने की बजाय एक विशाल अग्निकुंड में कूदकर जान दे देती हैं। आज भी चित्तौड़ की महिलाओं के जौहर करने की बात को लोग गर्व से याद करते हैं, जिन्होंने दुश्मनों के साथ रहने की बजाय स्वयं को अग्नि को समर्पित करने की ठानी थी। 13वीं-14वीं सदी की महान भारतीय रानी पद्मिनी के साहस और बलिदान की गौरवगाथा इतिहास में अमर है।
विज्ञापन

7 of 11
padmaavat
पद्मावती का जन्म सिंहल देश में हुआ। उनके पिता राजा गंधर्वसेन व माता चंपावती थीं। उनका विवाह मेवाड़ के रावल रतनसिंह के साथ हुआ। महारानी बन चित्तौड़गढ़ फोर्ट पहुंचीं पद्मावती के सौंदर्य के चर्चे उस समय पूरे देश में चर्चित होने लगे। इस दौरान रावल रतनसिंह ने किसी बात पर नाराज होकर राघव चेतन नामक राज चारण को देश निकाला दे दिया। राघव ने दिल्ली दरबार में जाकर महारानी पद्मावती के सौंदर्य का बखान अल्लाउद्दीन के सामने किया।

8 of 11
padmaavat
पद्मावती के सौंदर्य का बखान सुनकर अल्लाउद्दीन रानी पद्मावती को हासिल करने को लालायित हो उठा और चित्तौड़ पर चढ़ाई कर दी। खिलजी की सेना के कूच करते ही रावल रतनसिंह ने चित्तौड़गढ़ फोर्ट में राजपूतों की सेना को एकत्र करना शुरू कर दिया। खिलजी की सेना ने कई माह तक फोर्ट को घेरे रखा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। सफलता मिलती नहीं देख खिलजी ने एक दांव खेला।

9 of 11
padmaavat
उसने रतनसिंह के समक्ष प्रस्ताव रखा कि एक बार वह महारानी पद्मावती के दीदार करवा दे, इसके बाद वह घेरा उठा देगा। इस प्रस्ताव से रतनसिंह आग बबूला हो गए, लेकिन पद्मावती ने खूनखराबा रोकने के लिए अपने पति को इसके लिए तैयार कर लिया। चित्तौड़गढ़ फोर्ट में स्थित महारानी के महल में लगे एक शीशे को इस तरह लगाया गया कि उसमें पद्मावती के स्थान पर खिलजी को सिर्फ प्रतिबिम्ब नजर आए।

10 of 11
padmaavat
प्रतिबिम्ब में ही पद्मावती को देखते ही खिलजी की नीयत डोल गई और उसने बाहर निकलते समय उसे छोड़ने बाहर तक आए रतनसिंह को पकड़ लिया। रतनसिंह की जान की एवज में खिलजी ने प्रस्ताव रखा कि पद्मावती को सौंपने के बाद ही वह रतनसिंह को रिहा करेगा। इस प्रस्ताव के बाद पद्मावती ने अपने सात सौ लड़ाकों को तैयार किया और प्रस्ताव भेजा कि वह दासियों के साथ खिलजी से मिलने आ रही है।
विज्ञापन

11 of 11
padmaavat
सात सौ पालकियों में दासियों के स्थान पर लड़ाकों के साथ पद्मावती खिलजी के डेरे में पहुंची और हमला बोल दिया। देखते ही देखते रतनसिंह को आजाद करवा कर वह फोर्ट में लौट गईं। इससे खफा हो खिलजी ने आक्रमण कर दिया तो पद्मावती ने सोलह हजार राजपूत महिलाओं के साथ जौहर करने का निर्णय किया। गोमुख के उत्तर में स्थित मैदान में जौहर तैयार करवाया गया और कुलदेवी की पूजा के बाद महारानी पद्मावती के साथ सोलह हजार महिलाएं बारी-बारी से जौहर की चिता में कूद पड़ीं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें