देखिए ये बच्चा कुदरत के करिश्मे से कम नहीं है, तस्वीरें गवाह हैं। देखने में अजीब सा लगता है, पर इसकी कही हर बात सच हो जाती है।
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कुदरत के करिश्मे से कम नहीं प्रांशु
वैसे तो देश में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है, लेकिन इसके पीछे कोई धार्मिक वजह नहीं है। बच्चों का दिल साफ होता है, उनके दिल में पक्षपात नहीं होता। इस कारण बच्चों को भगवान के रूप में देखा जाता है, लेकिन यहां का मामला थोड़ा अलग है।
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कुदरत के करिश्मे से कम नहीं प्रांशु
पंजाब के जालंधर का 8 साल प्रांशु आजकल लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे गणेश मानकर पूजते हैं और इसके लिए बकायदा दरबार लगाया जाता है। दूर दूर से लोग इस बच्चे की पूजा करने के लिए आते हैं।
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कुदरत के करिश्मे से कम नहीं प्रांशु
पिता कमलेश मिस्त्री हैं और मां राजिंदरी हाउस वाइफ। इनकी पांच संतानों में एक प्रांशु ही ऐसा है, जिसके सिर की हड्डी नहीं है। उसकी टांगें कमजोरी के कारण शरीर का भार उठाने में असमर्थ हैं। वह ठीक से चल नहीं पाता।
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कुदरत के करिश्मे से कम नहीं प्रांशु
पिता कमलेश ने बताया कि वे भी इसे भगवान का ही रूप मानते हैं। वे भी इसकी पूजा करते हैं और आशीर्वाद लेकर घर से काम पर निकलते हैं। वह रोज स्कूल भी जाता है। लोग उसे देखकर फूल देकर उसका स्वागत करते हैं।
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कुदरत के करिश्मे से कम नहीं प्रांशु
कमलेश ने बताया कि जब प्रांशु का जन्म हुआ तो जिसने भी देखा वह चकित रह गया। इसका सिर सामान्य से कुछ बड़े आकार का था तथा आंखें सामान्य आकार से कुछ छोटी थी। देखने में इसका चेहरा पौराणिक भगवान गणेश के जैसा ही था।
वहीं एक डॉक्टर का कहना है कि जन्मजात बीमारी के चलते प्रांशु का सिर काफी बड़ा और आंखे छोटी रह गई। बताया जाता है कि इसकी वजह गर्भ में उसका उचित विकास न हो पाना था।