संघोल में मिले सभ्यता के अवशेष।
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अशोक ने यहां बनवाए थे पांच बौद्ध स्तूप
भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े लुंबिनी, राजगीर, बोधगया, सारनाथ, वैशाली, श्रावस्ती, कौशांबी, नालंदा, चंपा, पाटलीपुत्र व कुशीनगर बौद्ध धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इनसे अलग एक बौद्ध स्थल और भी है। वह है संघोल का बौद्ध विहार। भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण के लगभग सौ साल बाद मौर्य सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए उनकी चिता भस्म पर स्तूप बनवाए थे। ये स्तूप सारनाथ, सांची, नालंदा, तक्षशिला सहित देश के विभिन्न भागों और अफगानिस्तान व ईरान में स्थित है। कुछ जानकारों के मुताबिक स्तूपों में से पांच स्तूप संघल अर्थात संघोल नगर में बने थे। हालांकि इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। यह मात्र जनश्रुतियां हैं। कहा जाता है कि इन पांच स्तूपों में से तीन स्तूपों को ग्रामीणों ने अनजाने में नष्ट कर दिया। अब भी यहां दो बौद्ध स्तूपों या मठों के अवशेष देखे जा सकते हैं।