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सिंघु बॉर्डर से लौटने लगे किसान, अब मनाने में जुटे नेता, दिल्ली बवाल से दुखी अन्नदाता

Thu, 28 Jan 2021 01:20 AM IST
ajay kumar अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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सिंघु बॉर्डर से किसान लौटने लगे हैं। - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में बवाल और लाल किला की घटना के बाद किसानों की घर वापसी शुरू हो गई है। गणतंत्र दिवस पर होने वाली इन घटनाओं को जहां किसान नेता खुद गलत मान रहे हैं, वहीं किसान भी लाल किला पर तिरंगा से अलग झंडा फहराने से काफी निराश हैं। इसलिए हरियाणा के किसानों ने मंगलवार की रात ही घर वापसी शुरू कर दी थी।
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धरने से लौटने लगे किसान। - फोटो : अमर उजाला
पंजाब के किसानों के लौटने का सिलसिला शुरू होने से कतार नहीं टूट रही है। जहां नेशनल हाईवे 44 पर करीब 60 हजार ट्रैक्टर के साथ दो लाख किसान डटे थे, वहीं अब हाईवे पर 10 हजार से कम ट्रैक्टरों के संग किसान बचे हैं। अभी किसान वापस लौटने में लगे हैं। यह देखते हुए किसान संगठनों के नेता उनको रोकने में लगे हैं और अब मंच तक से अपील करनी पड़ रही है। कृषि कानूनों के विरोध में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड निकालने के एलान के बाद पिछले करीब 10 दिन से किसानों का ट्रैक्टर लेकर पहुंचने का सिलसिला शुरू था।
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मंच पर बैठे किसान नेता। - फोटो : अमर उजाला
सबसे ज्यादा किसान सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे, जहां हरियाणा व दिल्ली के करीब 60 हजार ट्रैक्टर के अलावा दो लाख किसान जमा थे। जिस तरह से गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड में दिल्ली के अंदर बवाल हुआ है और लाल किला पर किसी धर्म विशेष का झंडा फहराया गया है, उससे किसानों व आम आदमी के बीच काफी गलत संदेश गया है और उसका असर अब आंदोलन पर दिखाई देने लगा है। नेशनल हाईवे 44 पर जहां मंगलवार को पैदल चलने तक की जगह नहीं थी। वहीं केजीपी-केएमपी से आगे तक बुधवार सुबह को नेशनल हाईवे खाली हो गया। ज्यादातर वह किसान वापस घर चले गए जो केवल परेड के लिए आए थे। वहीं पहले से धरनास्थल पर जमा कुछ किसान भी वापसी की राह पकड़े हैं।

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कुंडली बॉर्डर पर बैठे किसान। - फोटो : अमर उजाला
किसान नेताओं को खुद भी लगता है कि जिस तरह से किसानों की घर वापसी शुरू हो गई है, वह आंदोलन के लिए सही नहीं है। अब किसानों को घर वापस जाने से रोकने के लिए किसान संगठनों के नेता जुटे हैं। किसान संगठनों के नेताओं ने केएमपी-केजीपी गोलचक्कर के पास कुछ किसानों को रोकने का काफी प्रयास किया लेकिन वह दोबारा वापस आने की बात कहकर पंजाब चले गए। इसके अलावा कुंडली बॉर्डर पर बने मुख्य मंच से किसान नेताओं को लगातार यही अपील करनी पड़ी कि किसान घर वापस न जाए। यहां तक कहा गया कि जितने किसान धरनास्थल पर मौजूद है, वह अपने परिजनों और जानकारों को वापस जाने से रोके। 
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केजीपी-केएमपी का गोल चक्कर खाली। - फोटो : अमर उजाला
धरनास्थल पर मौजूद किसानों के पास घर से आने लगे फोन
कुंडली बॉर्डर पर कुछ किसान अपने परिवारों के साथ डेरा डाले हुए है तो कुछ किसान अकेले ही वहां आए हैं। ऐसे ही पंजाब व हरियाणा दोनों राज्यों के किसानों के पास घर से फोन आने लगे हैं। उनसे जहां दिल्ली की घटनाओं की पूरी जानकारी लेने के साथ ही घर वापस आने के लिए भी कहा जा रहा है। धरनास्थल पर डटे काफी किसानों पर परिवार वालों का दबाव आने लगा है। 
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जीटी रोड पानीपत की तरफ खाली। - फोटो : अमर उजाला
बाईपास पर अब भी जमा किसान, ट्रैक्टर परेड वाले ही वापस लौटे
उधर, बुधवार सुबह टीकरी बॉर्डर पर वे किसान जमे रहे, जो लंबे समय से आंदोलन में भाग लेने आए थे। टीकरी बॉर्डर के अलावा, रोहतक बाईपास पर किसानों के ट्रैक्टर व ट्रॉली पहले की तरह खड़े हैं। किसानों का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा आंदोलन को लेकर जो निर्णय लेगा, उसी का अनुशरण करेंगे।

मैं जब धरनास्थल पर आया तो यहां काफी भाईचारा देखा था। किसान ट्रैक्टर परेड में कुछ शरारती तत्वों ने बवाल किया और लालकिला पर धार्मिक झंडा फहराया है। इससे आंदोलन की काफी बदनामी हुई है और इसका काफी गलत संदेश गया है। इसका परिणाम भी गलत ही निकलेगा। - दिलबाग सिंह, एनआरआई पंजाब। 
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केएमपी पर होल हुए चालू। - फोटो : अमर उजाला
जिस तरह से ट्रैक्टर परेड में बवाल हुआ और लाल किला पर झंडा फहराया है। यह काफी गलत हुआ है और इससे किसान आंदोलन को बहुत ठेस पहुंची है। इससे लग रहा है कि हमारे मुद्दे भटक गए हैं। इस तरह से नहीं होना चाहिए था। किसान लौट रहे हैं। जितेंद्र सिंह, किसान।
 
गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड के लिए किसानों का बड़ा हुजूम उमड़ा था लेकिन अब सभी वापस जा रहे हैं। इन सभी किसानों को किसी भी तरह से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली में जिस तरह से हुआ है, उसे हम खुद भी गलत मानते है। किसानों को रोको किसी भी तरह। - गुरनाम सिंह चढूनी, किसान नेता।
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